• Mon. Mar 9th, 2026

Chanakya News India

News Broadcast Live TV

दमोह वर्धा :-धरोहर पर संकटः धन की खोज में लुट रहा इतिहास, बचा सिर्फ खंडहर किला

वर्धा गांव का मामला 17वीं शताब्दी में राजा गुमान सिंह व पद्म सिंह ने कराया था किले का निर्माण

धरोहर पर संकटः धन की खोज में लुट रहा इतिहास, बचा सिर्फ खंडहर किला

बर्धा

गोंड शासन काल में निर्मित वर्धा गांव के घने जंगलों के बीच स्थित ऐतिहासिक किला अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी है यह स्पष्ट न होने के कारण किला जस का तस उपेक्षा का शिकार है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार पुरातत्व विभाग की सूची में भी इस किले का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। किले की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि कुछ दीवारें और अधूरे अवशेष ही इसके इतिहास की गवाही देते नजर आते हैं, जबकि शेष भाग जमींदोज होकर मिट्टी में समा चुका है। बताया जाता है कि इस किले का निर्माण 17 वीं शताब्दी ईस्वी में राजा गुमान सिंह और पद्म सिंह द्वारा कराया गया था। कहा जाता है कि यहां से एक गुप्त सुरंग भी निकली थी, जो करीब 20 किमी दूर मड़ियादो किले तक जाती थी।

आस्था का केंद्र भी है परिसर

किला परिसर में दाने बब्बा की स्थापना भी की गई है, जो आसपास के ग्रामीणों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालु यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। किले के भीतर स्थित प्राचीन बावड़ी में आज भी पानी मौजूद रहता है, लेकिन सफाई के अभाव में वह जलकुंभी से भर चुकी है।

वर्धा गांव स्थित जंगल में किला खंडहर में तब्दील

संरक्षण का अभावः गड़ा धन खोज रहे अज्ञात तत्व

किले का सबसे चिंता जनक पहलू यह है कि अज्ञात लोग गड़े धन की खोज में किला परिसर में लगातार खुदाई कर रहे हैं। ताजा गड्डों और खोदी गई मिट्टी के ढेर इसके स्पष्ट संकत देते हैं। संरक्षण के अभाव में यह ऐतिहासिक धरोहर लगातार क्षतिग्रस्त होती जा रही है। स्थानीय निवासी कृष्ण कुमार दुबे, धीरेंद्र शास्त्री, उत्तम पटेल, पंचम यादव, प्रदीप गुप्ता, दीनदयाल गुप्ता, बेड़ी पटेल,आसाराम पटेल, राजेंद्र पटेल सहित अन्य लोगों की मांग है

कि किला को पुरातत्व विभाग अपने अधिकार में ले और इससे गुम होने से बचाए ताकि किला का इतिहास आगे की पीढ़ी भी जान सके