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दमोह फसलों को कोहरा ,पाले से बचाव के उपाय-कृषि वैज्ञानिक डाँ अहिरवार

फसलों को कोहरा ,पाले से बचाव के उपाय-कृषि वैज्ञानिक डाँ अहिरवार
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कृषि वैज्ञानिक डाँ मनोज अहिरवार ने बताया किसान साथियों आने वाले 4- 6 दिनों में ठंड में मामूली सी कुछ कमी आएगी, तापमान थोड़ा सा बढ़ेगा , आने वाले समय में पाला पड़ने की संभावना थोड़ा कम हैं, फिर भी किसान भाई समय पर ज़रूरी उपाय करके फसलों में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता हैं।

तुषार या पाले से फसलों के बचाव के उपाय

वर्तमान में शीतलहर तथा अधिक ठंडी के कारण पाला पडऩे की संभावना एवं उससे बचाव के उपाय की जानकारी किसान भाइयों को दी जा रही है। जिसे अपनाकर काफी हद तक फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं। उत्तर एवं पश्चिम से ठंडी हवाएं एवंं बर्फबारी के चलते तापमान में गिरावट होने के कारण फसलों एवं उद्यानिकी फसलों पर पाला पडऩे की संभावना बढ़ जाती है। पाला विशेषकर दिसंबर तथा जनवरी के महीने में ज्यादा पडऩे की संभावना रहती है। पाला के प्रभाव से प्रमुख रूप से उद्यानिकी फसलें जैसे टमाटर, बैंगन, आलू, फूलगोभी, मिर्च, धनिया, पालक तथा फसलों में प्रमुख रूप से मसूर ,चना , सरसों तथा कुछ मात्रा में गेहूं ,जौ, आदि के प्रभावित होने की ज्यादा संभावना रहती है विशेषकर जब यह फूल और फल की अवस्था में हो। अत: पाले से बचाव के लिए यहां किसान भाइयों को कुछ विशेष उपयोगी सलाह दी जाती हैं जिससे कि समय रहते इसे अपनाकर काफी हद तक अपनी फसलों को बचा सके।

तुषार या पाला से फसलों का बचाव

पाला पडऩे की संभावना होने पर किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वह रात्रि 10 बजे से पहले दिन में सिंचाई अवश्य करें। फसलों में सिंचाई रात्रि के दूसरे तथा तीसरे पहर में नहीं करें। पाला की आशंका होने पर फसलों तथा उद्यान की फसलों में घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत डब्ल्यू पी का दो से ढाई ग्राम मात्रा को प्रति लीटर की दर से पानी में घोल बनाकर डेढ़ से दो सौ लीटर पानी में घोलकर फसलों के ऊपर प्रति एकड़ की दर से छिडक़ाव करें। इससे दो से ढाई डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान बढऩे से काफी हद तक पाला से बचाया जा सकता है।

फसलों में पाले की आशंका होने पर व्यावसायिक गंधक के तेजाब का 0.1 प्रतिशत के घोल का अर्थात् 1 मिलीलीटर दवा को प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसलों के ऊपर छिडक़ाव करें परंतु ध्यान रखें की इसकी संतुलित और निश्चित मात्रा का ही प्रयोग करें अन्यथा फसल को नुकसान हो सकता है। इसी प्रकार इसके स्थान पर थायो यूरिया का 0.5 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोल की दर से छिडक़ाव करने से भी पाला से काफी हद तक फसलों को बचाया जा सकता है। प्रत्येक अवस्था में पानी की मात्रा प्रति एकड़ डेढ़ से दो सौ लीटर अवश्य रखें।

पाला से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी में होता है। इसलिए रात्रि के समय नर्सरी में लगे पौधों को प्लास्टिक की चादर से ढक करके बचाया जा सकता है। ऐसा करने से प्लास्टिक के अंदर का तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है जिसके कारण तापमान जमाव बिंदु तक नहीं पहुंचता है और पौधे पाला से बच जाते हैं। लेकिन यह तकनीकी कम क्षेत्र के लिए उपयोगी है। जिन किसान भाइयों ने 1 से 2 वर्ष के फलदार पौधों का अपने खेतों में वृक्षारोपण किया हो उन्हें बचाने के लिए पुआल, घास-फूस आदि से अथवा प्लास्टिक की सहायता से ढककर बचायें। प्लास्टिक की सहायता से क्लोच अथवा टाटिया बनाकर पौधों को ढक देने से भी पाला से रक्षा होती है। इसके अलावा थालों के चारों ओर मल्चिंग करके सिंचाई करते रहें।

दिसंबर से फरवरी माह तक अधिक ठंड पडऩे के कारण पशु तथा बछड़ों आदि को भी रात्रि के समय घरों के अंदर बांधें तथा उन्हें बोरे तथा जूट के बोरे तथा टाट-पट्टी से ओढ़ाकर ठंठ से बचायें। इसी प्रकार मुर्गी तथा बकरी घर को भी चारों तरफ से पॉलीथिन की सीट या टाट-पट्टी आदि से बांधकर ठंडी हवाओं से चारों तरफ से बचायें।

छोटे किसान भाई जहां पर खेतों का क्षेत्रफल कम हो वहाँ मध्यरात्रि के बाद मेड़ों के ऊपर उत्तर तथा पश्चिम की तरफ घास-फूस आदि में थोड़ा नमी बनाकर जलाकर धुआ करें हालांकि यह प्रक्रिया पर्यावरणीय दृष्टि से उचित नहीं है पर इससे भी पाला से बचाव में सहायता मिलती है।

ज्यादा ठंड तथा पाला पडऩे पर मनुष्यों एवं बच्चों को भी सलाह दी जाती है कि वह रात्रि के तीसरे और चौथे पहर में खेतों की मेड़ों पर या यहाँ-वहाँ न घूमें। तथा गर्म कपड़े आदि पहन कर घर में ही रहें एवं सूर्योदय के बाद ही घर से निकलने की सलाह दी जाती है।
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