वर्धा में भरने वाले 10 दिवसीय मेला में प्रभु श्रीराम की लीला का मंचन कर रहे स्थानीय कलाकार
100 साल से वर्धा के कलाकार निभा रहे रामलीला की परंपरा
चाणक्य न्यूज़ दमोह/वर्धा
हटा ब्लॉक की ग्राम पंचायत वर्धा में वसंत पंचमी से पूर्णिमा तक चलने वाले 10 दिवसीय परंपरागत मेले के दूसरे दिन रामलीला मंचन करने वाले कलाकार खास आकर्षण का केंद्र बने रहे। इस रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बाहर से कोई कलाकार नहीं बुलाया जाता, बल्कि गांव के ही कलाकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यह रामलीला पिछले करीब 100 वर्षों से लगातार आयोजित हो रही है। रामलीला मंचन में शामिल कलाकारों ने भगवान
रामलीला में बालकों को राम-सीता का वेश धारण कराकर ले जाते श्रद्धालु।
श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी और रावण सहित अन्य पात्रों का
जीवंत अभिनय कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों ने
संवाद अदायगी, वेशभूषा और भाव-भंगिमाओं के जरिए रामकथा को भाव पूर्ण प्रस्तुत कर रहे है। ग्रामीण महंत प्रदोष दुबे का कहना है कि वे इसे इसे मंचन नहीं, बल्कि सेवा मानकर निभाते हैं। हमारे लिए रामलीला अभिनय नहीं, आस्था है। पूर्वजों से मिली इस जिम्मेदारी को हम पूरे मन से निभाते हैं। हनुमान जी की कृपा से 100 वर्षों से यह परंपरा चल रही है। कई कलाकार ऐसे हैं, जिन्होंने अपने पिता और दादा को रामलीला करते देखा और उसी से प्रेरणा लेकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया। दिनभर खेत-खलिहान और मजदूरी करने के बाद भी कलाकार रात में अभ्यास कर रामलीला की तैयारी करते हैं।
वर्धा सहित 50 गांव के ग्रामीण मेला परिसर पहुंच रहे
रामलीला देखने के लिए वर्धा ही नहीं, बल्कि आसपास के करीब करीब 50 गांवों से लोग मेला परिसर पहुंच रहे हैं। दर्शकों का रहता है। कहना है कि यहां की रामलीला में सादगी और भक्ति का भाव झलकता है, जो बड़े मंचों पर होने वाले आयोजनों से अलग पहचान बनाता है। ग्रामीणों का मानना है कि श्री हनुमान जी की कृपा से ही यह परंपरा बिना किसी बाधा के चल रही है। इतने वर्षों में न तो मंचन रुका और न ही मेला बंद हुआ। यही वजह है कि कलाकारों में भी इस आयोजन को लेकर विशेष श्रद्धा और जिम्मेदारी का भाव
