भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दमोह में संरक्षण सहायक उप मंडल कार्यालय तैयार
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जिला प्रशासन की पहल से संरक्षण कार्यों को मिलेगी नई गति
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ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में दमोह जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के जबलपुर मंडल अंतर्गत दमोह में संरक्षण सहायक उप मंडल लगभग तैयार हो चुका है। शीघ्र ही यहां कंजर्वेशन असिस्टेंट की पदस्थापना की जाएगी।
यह सफलता जिला प्रशासन के सतत प्रयासों और लगातार पत्राचार का परिणाम रही है। नवस्थापित कार्यालय शहर की एक प्राचीन में बनाया गया है, यह ऐतिहासिक संरचना अपनी मजबूती और स्थापत्य सौंदर्य के लिए विशेष पहचान रखती है। भवन के भीतर ऊपर जाने के लिए 27 फीट 5 इंच ऊंची लोहे की सीढ़ी आज भी सुरक्षित और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
संरक्षण कार्यों को मिलेगा स्थानीय स्तर पर संबल
नवगठित उप मंडल कार्यालय दमोह एवं आसपास के संरक्षित स्मारकों के संरक्षण, देखरेख और नियमित रखरखाव से जुड़े कार्यों के लिए स्थापित किया जा रहा है।
सीनियर कंजर्वेशन असिस्टेंट सुभाष कुमार ने जानकारी दी यहां कंजर्वेशन असिस्टेंट सहित आवश्यक सहयोगी स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी, जो स्मारकों की मरम्मत, संरचनात्मक मजबूती और संरक्षण संबंधी तकनीकी कार्यों को गति देंगे।
क्षेत्रीय धरोहरों को मिलेगा लाभ
उन्होंने कहा अब तक जबलपुर मंडल के अंतर्गत सागर, जबलपुर, रीवा और खजुराहो उप मंडल कार्यरत थे। दमोह में नए उप मंडल की स्थापना से क्षेत्रीय स्मारकों के संरक्षण कार्य अधिक सुदृढ़, प्रभावी और समयबद्ध तरीके से संपादित किए जा सकेंगे।
वर्तमान भवन में मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। प्रशासनिक बैठक के उपरांत औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम की तिथि निर्धारित की जाएगी। यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को नई दिशा देगी, बल्कि दमोह की सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त बनाएगी।
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