उर्वरक वितरण को सरल, सुगम तथा पारदर्शी बनाने के लिए लागू की जाएगी ई-विकास प्रणाली
==*एस के पटैल चाणक्य न्यूज़ इंडिया *
ई-विकास प्रणाली से किसान बंधु डबल लॉक केंद्रों, एमपी एग्रो, निजी विक्रेताओं तथा सहकारी समितियों में टोकन बुक करके प्राप्त कर सकते हैं उर्वरक
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अनुशंसा के अनुसार किसानों को मिलेगा उर्वरक
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आगे चलकर होम डिलीवरी की भी होगी सुविधा
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1 मार्च 2026 से लागू हो गई नई व्यवस्था
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प्रदेश सरकार द्वारा उर्वरक वितरण व्यवस्था हेतु विकास प्रणाली का विकास किया गया है इसके क्रियान्वयन एवं लागू किए जाने के उद्देश्य से कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर की मौजूदगी में कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। कृषि विभाग के सहायक संचालक जे.एल. प्रजापति द्वारा उर्वरक वितरण की ई-विकास प्रणाली का प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया।
सहायक संचालक श्री प्रजापति ने बताया उर्वरक वितरण की ई-विकास प्रणाली किसानों को उर्वरक प्रदान करने हेतु पारदर्शी, सुगम, सरल एवं जवाब देही प्रक्रिया है, जिसमें किसानों को घर बैठे बिना लाइन लगे अपने मोबाइल से ई-टोकन बुक कर डबल लॉक केंद्रों, निजी विक्रेताओं, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों, एमपी एग्रो मार्केटिंग समिति आदि किसी भी जगह से उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया प्राथमिक सहकारी समितियां में, सभी निजी विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों में, सभी डबल लॉक केंद्रों में, सभी ग्राम पंचायत में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में क्यूआर कोड चस्पा किए जा रहे हैं ताकि किसान बंधु क्यूआर कोड स्कैन कर सीधे उर्वरक वितरण की ई-विकास प्रणाली के माध्यम से स्वयं अथवा विभाग के अधिकारी/ कर्मचारियों से नि:शुल्क टोकन बुक कर सकेंगे।
उन्होंने बताया किसान बंधुओं अपने आधार कार्ड से पंजीयन करा कर तथा एग्री स्टेट आईडी से अपनी भूमि की जानकारी जोड़कर अपनी पसंद के विक्रेता का चयन कर आसानी से खाद प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सभी किसान बंधुओ से आग्रह किया है कि जिन किसान बंधुओं ने अपनी एग्री स्टेट आईडी नहीं बनवाई है ऐसे किसान बंधु जल्द से जल्द अपनी एग्री स्टेट आईडी बनवा ले, ताकि उर्वरक प्राप्त करने में कोई समस्या ना हो । आगे भविष्य में एग्री स्टेट आईडी से ही कृषि से संबंधित सभी योजनाओं का लाभ दिया जाना प्रस्तावित है।
ज्ञातव्य है जिले में दिसंबर माह से ई-टोकन प्रणाली लागू है जो सिर्फ डबल लॉक केंद्रों, एमपी एग्रो एवं मार्केटिंग सोसायटी से खाद प्राप्त करने हेतु लागू की गई थी, परंतु उर्वरक वितरण की ई-विकास प्रणाली सभी प्रकार के उर्वरक विक्रेताओं के लिए जिले में 01 मार्च 2026 से लागू की जा रही है।
