बैंक मैनेजर की चालबाज़ी उजागर, उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
5 लाख की एफडी पर ब्याज, मुआवजा और खर्च देने का आदेश
मुरादाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम, मुरादाबाद ने एक अहम फैसले में प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक को सेवा में कमी और लापरवाही का दोषी ठहराते हुए उपभोक्ता रामौतार के पक्ष में राहत प्रदान की है। आयोग ने बैंक को 5 लाख रुपये की एफडी पर ब्याज, मुआवजा और वाद व्यय देने का निर्देश दिया है।
संभल जिले के ग्राम बाराही निवासी 68 वर्षीय रामौतार ने शिकायत में बताया कि उन्होंने 18 जुलाई 2022 को बैंक की बाराही शाखा में ₹5,00,000 सावधि जमा (एफडी) के रूप में जमा किए थे। बैंक मैनेजर ने उन्हें एफडी रसीद जारी की, जिसका बाद में दो बार नवीनीकरण भी किया गया। लेकिन परिपक्वता तिथि पर जब उन्होंने भुगतान मांगा तो बैंक ने रिकॉर्ड न होने का हवाला देकर भुगतान से इंकार कर दिया।
बैंक की ओर से दलील दी गई कि संबंधित एफडी उनके सिस्टम में दर्ज नहीं है और प्रस्तुत रसीद संदिग्ध है। साथ ही यह भी कहा गया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने संभवतः बैंक स्टेशनरी का गलत उपयोग किया होगा। उल्लेखनीय है कि संबंधित शाखा प्रबंधक का निधन हो चुका है।
आयोग ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और तर्कों का परीक्षण करते हुए पाया कि एफडी रसीद पर बैंक की मोहर और अधिकृत हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिससे यह साबित होता है कि रसीद बैंक द्वारा ही जारी की गई थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि बैंक कर्मचारी ने सिस्टम में प्रविष्टि नहीं की, तो इसका दायित्व उपभोक्ता पर नहीं डाला जा सकता।
हालांकि, आयोग ने यह भी माना कि परिवादी को ₹5,00,000 की मूल राशि पहले ही प्राप्त हो चुकी थी। इसी आधार पर आयोग ने बैंक को आदेश दिया कि वह 18 जुलाई 2022 से 30 दिसंबर 2022 तक की अवधि के लिए 10% वार्षिक ब्याज अदा करे। साथ ही मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए ₹10,000 और वाद व्यय के रूप में ₹5,000 एक माह के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह फैसला बैंकिंग लापरवाही के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है और उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा को मजबूती देता है।
