Mau
23/09/2024
जिलाधिकारी के मार्गदर्शन एवं मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में संभव अभियान में जनपद प्रदेश में तीसरे स्थान पर।

Mau कुपोषण के रोकथाम हेतु चलाए जा रहा है पोषण अभियान।
मऊ
Mau जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी के कुशल मार्ग दर्शन में बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचातीराज विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग इत्यादि कन्वर्जेन्स विभागों के सहयोग एवं प्रयास से जनपद मऊ सम्भव (SAMbhav) अभियान में प्रदेश में तीसरे स्थान तथा पूर्वांचल के जनपदो में प्रथम स्थान पर है। भारत सरकार द्वारा पूरे देश में दिनांक 1 से 30 सितम्बर, 2024 तक 7वाँ ‘राष्ट्रीय पोषण माह” 2024 मनाया जा रहा है। कुपोषण की समस्या बच्चों, किशोरियों एवं महिलाओं में व्याप्त है।

Mau बच्चों में कुपोषण से उनका शारीरिक व मानसिक विकास कम होता है। बच्चों में बौनापन, नाटापन आदि कुपोषण के प्रकार है। इसी प्रकार 11 से 18 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों व प्रजनन योग्य अहिलाओं में खून की कमी एक व्यापक समस्या है, जिससे मातृत्व मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर की समस्या बनी रहती है। कुपोषण न केवल गरीबी से जुड़ा है बल्कि कुरीतियों, सामुदायिक व्यवहारों व आदतों से भी जुड़ा है। इसी को देखतें हुए भारत सरकार इस समस्या को समाप्त करने के लिए राज्य सरकारों के संग मिलकर विभिन्न आयामों में प्रयास कर रही है। कुपोषण की रोकथाम एवं सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन हेतु पिछले कई वर्षों से पोषणएक जन आन्दोलन अभियान चलाया जा रहा है। यह आन्दोलन कन्वर्जेन्स विभागों के समन्वय से मनाया जा रहा है।
Mau 01 सितम्बर से 30 सितम्बर 2024 तक 7वा राष्ट्रीय पोषण माह पूरे देश में मनाया जा रहा है। इसका लक्ष्य बच्चों में नाटापन, अल्प वजन व महिलाओं में एनिमिया की दर में कमी लाना है। पोषण माह का नोडल विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग है। पोषण अभियान एक बहुविभागीय कन्वर्जेन्स का अभियान है, जिसमें बाल विकास विभाग नोडल विभाग है, स्वास्थ्य विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, पंचायत राज विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, आयुर्वेदिक विभाग एवं जल निगम आदि कन्वर्जेन्स विभागों के सम्मलित प्रयासों से कुपोषण मुक्त भारत हेतु विशेष अभियान माह सितम्बर, 2024 में चलाया जा रहा है। कुपोषण की रोकथाम के लिए पंचायती राज विभाग हर घर शौचालय एवं स्वच्छ व्यवहारों को अपनाने के लिए विभिन्न जागरूक अभियान का आयोजन कर रहा है।
Mau स्वच्छ पेय जल की अनुपलब्धता भी कुपोषण का एक प्रमुख कारण है। भारत सरकार द्वारा हर घर नल से जल योजना इसी उद्देश्य से चलाई जा रही है कि आम जन मानस को स्वच्छ पेयजल उलब्ध हो तथा कुपोषण में कमी हो सके। राष्ट्रीय पोषण माह का मुख्य फोकस समाजिक और व्यवहार परिवर्तन संचार, समुदायिक सहभागिता पर है। इसके अन्तर्गत कन्वर्जेन्स विभागों के समन्वय एवं समेकित प्रयासों से पोषण आधारित जीवन चक्र के महत्वपूर्ण चरणों यथा गर्भावस्था, शैशवस्थ एवं किशोरावस्था में पोषण के सम्बन्ध में जन-जागरूकता हेतु आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषण गोष्ठी / पोषण रैली आदि जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
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Mau वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों में स्थित जनपद के 1529 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 03 से 06 वर्ष तक के आने वाले बच्चों को शाला पूर्व / ECCE के साथ हाट कुक्ड भी दिया जा रहा है। बाल विकास विभाग द्वारा प्रति माह लक्षित वर्गों को पूरक आहार प्रदान कर रहा है ताकि पोषण तत्वों की कमी को पूरा कर कुपोषण कम किया जा सके। आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से रेसीपी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें पूरक आहार के साथ-साथ मोटे आनाजो को मिलाकर पौष्टिक आहार तैयार किये जाने की विधि का प्रचार प्रसार किया जाता पोषण अभियान के वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक सतर पर व्यवहार परिवर्तन एक महत्वपूर्ण चरण है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा
इस वर्ष सितम्बर, 2024 में आयोजित किये जाने वाले पोषण माह की मुख्य थीम एनीमिया (टेस्ट, ट्रीट, टॉक), वृद्धि निगरानी ऊपरी आहार एवं पोषण भी पढ़ई भी (पी०बी०पी०बी०) निर्धारित को गई है।
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राजेश वर्मा
स्टेट कोऑर्डिनेटर उत्तर प्रदेश
चाणक्य न्यूज नेटवर्क
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