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दमोह की माटी से आज भी है विशेष मोह – पुनर्गठन आयोग अध्यक्ष एस.एन. मिश्रा

दमोह की माटी से आज भी है विशेष मोह – पुनर्गठन आयोग अध्यक्ष एस.एन. मिश्रा
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श्री मिश्रा से मिलने वाला हर व्यक्ति अपनापन और विश्वास लेकर लौटता था-पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष डाँ. रामकृष्ण कुसमरिया
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जनसेवा के प्रति समर्पण से श्री मिश्रा ने समाज में छोड़ी अमिट छाप – विधायक श्री मलैया
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25 वर्षों के बाद भी एस.एन. मिश्रा का नाम दमोह की स्मृतियों में जीवंत – कलेक्टर श्री कोचर
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जिले की द्वितीय दमयंती व्याख्यान माला सम्पन्न
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दमोह जिला उनके लिए केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का केंद्र रहा है। प्रशासनिक रूप से स्वतंत्र प्रभार के रूप में उनकी प्रथम पदस्थापना दमोह में हुई थी, जहाँ प्रशासन के कई महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किए और लोगों से गहरे पारस्परिक संबंध बने। ढाई वर्ष के कार्यकाल में सीखा प्रशासन जनता के साथ संवाद और सहयोग से अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है। वह शासन का प्रतिनिधि होता है और जब जनता की आकांक्षाओं को समझकर मिल-जुलकर समाधान खोजे जाते हैं, तो वे अधिक स्थायी और व्यावहारिक होते हैं। इस आशय के विचार मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष (सेवानिवृत्त आई.ए.एस.) श्री एस.एन. मिश्रा ने पीएमश्री महाविद्यालय दमोह में आयोजित दमयंती व्याख्यान माला में व्यक्त किए।

अध्यक्ष श्री मिश्रा ने कलेक्टर निवास और उसके परिसर को लेकर कहा कि यह किसी व्यक्ति का निजी निवास नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक संस्था के रूप में कार्य करता है। बंगला कार्यालय के रूप में उपयोग होने से अनेक प्रशासनिक निर्णय, अनुभव और स्मृतियाँ इससे जुड़ी रहती हैं। 18 एकड़ में फैला कलेक्टर बंगला परिसर और बेला ताल क्षेत्र शहर के लिए एक महत्वपूर्ण “ऑक्सीजन बैंक” रहा है, जिसे संरक्षित रखना एक समृद्ध परंपरा का हिस्सा है।

अध्यक्ष श्री मिश्रा ने दमोह की सांस्कृतिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महाकौशल और बुंदेलखंड की संयुक्त संस्कृति जिले को एक अलग पहचान देती है। उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली बताया कि उन्हें इस जिले में कार्य करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि समय के साथ दमोह में अधोसंरचना, सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आज शहर जनता की अपेक्षाओं के और अधिक नजदीक आता जा रहा है, जो सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री रामकृष्ण कुसमरिया ने एस.एन. मिश्रा के व्यक्तित्व और कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति अपनापन और विश्वास लेकर लौटता था। उन्होंने कहा कि जब भी कोई श्री मिश्रा से मिलने जाता था, तो सबसे पहले उनका सत्कार मिठाई से होता था। बातचीत और काम की चर्चा बाद में होती थी, लेकिन उनके शब्द इतने मधुर, नम्र और आत्मीय होते थे कि सामने वाला व्यक्ति स्वतः ही गदगद हो जाता था।

अध्यक्ष श्री कुसमरिया ने कहा कि श्री मिश्रा के व्यवहार से लोगों को यह भरोसा हो जाता था कि उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होगा। आज भी प्रशासनिक दायित्वों के तहत आयोग के अध्यक्ष के रूप में जो जिम्मेदारी उन्हें मिली है, उसके माध्यम से अधिकारियों को उचित मार्गदर्शन प्राप्त होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आयोग विभिन्न जिलों में सामने आ रही समस्याओं के समाधान का एक सशक्त माध्यम बनेगा और आमजन को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

दमोह विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री जयंत मलैया ने कहा हमारे जीवन में बहुत से लोग आते हैं, लेकिन कुछ लोग अपने कार्यों के कारण हमेशा याद रह जाते हैं। ऐसे ही व्यक्तित्वों में एस.एन. मिश्रा का नाम प्रमुख है, जिन्होंने अपने कार्यों से जनसेवा के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी है।

विधायक श्री मलैया ने कहा कि वे अध्यक्ष श्री मिश्रा का अत्यंत आदर करते हैं और ईश्वर से उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अध्यक्ष श्री मिश्रा इसी प्रकार जनसेवा करते रहेंगे और समाज के हित में निरंतर कार्य करेंगे। उन्होंने कहा श्री मिश्रा के पास अभी कार्य करने के लिए लंबा समय है और उनका अनुभव व समर्पण आने वाले समय में और अधिक सकारात्मक परिणाम देगा। अंत में विधायक श्री मलैया ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं।

कलेक्टर श्री सुधीर कुमार कोचर ने कहा कि एस.एन मिश्रा जैसे अधिकारी विरले होते हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त होने के वर्षों बाद भी जनता उन्हें उसी आत्मीयता और सम्मान के साथ याद करती है। उन्होंने बताया कि उनके साथ कार्य कर चुके लोगों से यह सुनने को मिला कि जब भी कोई एस.एन. मिश्रा सर से मिलने दमोह आता था, तो वे औपचारिक बातचीत से पहले सबका मुँह मीठा कराते थे। उनकी यही विनम्रता, सादगी और अपनापन था, जिसने उन्हें जनमानस के हृदय में स्थायी स्थान दिलाया।

कलेक्टर श्री कोचर ने वरिष्ठ पत्रकार गौतम जी द्वारा बताया गया एक दृष्टांत साझा करते हुए कहा कि एस.एन. मिश्रा सर का विदाई समारोह आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देने वाला प्रसंग है। उस समय दमोह में आयोजित विदाई समारोह में पूरा भवन खचाखच भरा हुआ था। पैर रखने तक की जगह नहीं थी और जनता द्वारा लगभग एक ट्रक भर फूल-मालाएँ उनके सम्मान में अर्पित की गई थीं।

उन्होंने कहा कि किसी भी शासकीय अधिकारी के लिए इससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता है कि उसका आगमन, कार्यकाल और प्रस्थान – तीनों ही जनता के प्रेम और विश्वास से जुड़े हों। यही कारण है कि 25 वर्षों के बाद भी एस.एन. मिश्रा का नाम दमोह की स्मृतियों में जीवंत बना हुआ है।

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