america ने वेनेजुएला पर हमला कर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने का दावा किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया एडेला अब अमेरिकी सैनिकों के कब्जे में हैं। उन्हें वेनेजुएला से बाहर ले जाया गया है।
CNN ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि मादुरो और उनकी पत्नी को सेना ने बेडरूम से घसीटकर बाहर निकाला और अपने कब्जे में लिया। अमेरिका ने बीती रात करीब 2 बजे (भारतीय समय के मुताबिक शनिवार सुबह 11:30 बजे) वेनेजुएला के 4 शहरों पर हमले किए थे।

इस दौरान अमेरिकी सैनिकों ने मिलिट्री ठिकानों और खास जगहों को निशाना बनाया। ट्रम्प ने कहा कि वे सुबह 11 बजे (भारतीय समय के मुताबिक रात 9:30 बजे) प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले पर पूरी जानकारी देंगे।
अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने बयान जारी कर कहा था कि वे जवाब देंगे। उन्होंने देशभर में इमरजेंसी लगाने का ऐलान किया था। उनके बयान जारी करने के 1 घंटे बाद ट्रम्प ने उन्हें पकड़ने का ऐलान किया।
अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला की सरकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी और वहां से अमेरिका के खिलाफ साजिशें हो रही थीं।
2. अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक वेनेजुएला में लोकतंत्र खत्म हो चुका है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा था।
3. अमेरिका यह भी दावा करता है कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अवैध गतिविधियों और हिंसा को बढ़ावा दे रहे थे।

CNN ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी सेना ने उनके बेडरूम से घसीटकर बाहर निकाला और उन्हें अपने कब्जे में लिया।
एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी सेना के स्पेशल डेल्टा फोर्स ने इस मिशन को अंजाम दिया। इसमें किसी भी अमेरिकी सैनिकों को कोई नुकसान नहीं हुआ।
ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने कहा है कि वह वेनेजुएला में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति ट्रम्प से बात करेंगे। स्टार्मर ने कहा कि मैं हमेशा मानता हूं कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी साफ किया कि ब्रिटेन इस हमले में किसी भी तरह से शामिल नहीं था।
ये पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने किसी देश पर सैन्य कार्रवाई करके वहां के राष्ट्रपति या तानाशाह को पकड़ा, इसके पहले 2003 में इराक और 1989 में पनामा में भी कुछ ऐसे ही ऑपरेशन चलाए गए थे।
पनामा, 1989: अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी देश पनामा पर हमला किया था। अमेरिका ने पनामा के तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को सत्ता से हटाया था, जिन पर ड्रग तस्करी और अमेरीकी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था।
इस हमले में अमेरिकी सेना ने पनामा सिटी समेत कई इलाकों पर बमबारी की थी, जिसमें करीब 2 हजार लोगों की मौत हुई थी और नोरिएगा को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया था।
इराक, 2003: अमेरिका ने इराक पर हमला किया। इसका मकसद इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाना था, जिन पर अमेरिका ने इराक के कई समुदायों पर हिंसा करने अल-कायदा का समर्थन करने और परमाणु हथियार रखने के आरोप लगाए थे।
अमेरिकी सेना ने बगदाद समेत कई शहरों पर बमबारी की और सद्दाम की सरकार गिरा दी गई। कुछ महीनों बाद सद्दाम हुसैन को पकड़ लिया गया।
इसके बाद सद्दाम पर इराक की अदालत में मुकदमा चलाया गया। इस दौरान इराक पर अमेरिकी सेना का कंट्रोल था।
AMERICA H-1B वीजा के लिए ₹88 लाख वसूलेगा
चीन ने नागरिकों को वेनेजुएला न जाने की सलाह दी
चीन ने वेनेजुएला की यात्रा को लेकर एडवाइजरी जारी की है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जो चीनी नागरिक, कर्मचारी या संगठन पहले से वेनेजुएला में हैं, उन्हें अपनी सुरक्षा पर ध्यान रखना चाहिए। अगर कोई इमरजेंसी आती है, तो चीनी नागरिक तुरंत लोकल पुलिस या चीनी दूतावास से संपर्क करें।
NEW DELHI शाहिद अफरीदी बोले- भारत इजराइल बनने की कोशिश कर रहा
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो फिर से सुर्खियों आ गई हैं। उन्हें 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।
मचाडो 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद से छिपकर रह रही हैं। उन्हें आखिरी बार 10 दिसंबर को देखा गया था, जब वे नोबेल शांति पुरस्कार लेने नॉर्वे गई थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी भी वह नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में हैं।
मचाडो ने मादुरे के खिलाफ हमेशा ट्रम्प के सख्त कदमों का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी कहा था कि वेनेजुएला में कम्युनिस्ट शासन खत्म करने के लिए अमेरिका को सैन्य हस्तक्षेप करना चाहिए।
NEW DELHI दुश्मन एक बूंद पानी नहीं छीन सकता: पाक PM की धमकी
