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टोंक से एस रहमान।कागजों में पूरा, जमीन पर अधूरा… पीपलू के विकास कार्यों पर सवाल।?

ByNews Editor

May 3, 2026

पीपलू /पंचायत समिति पीपलू क्षेत्र में 15वें वित्त आयोग के तहत कराए गए विकास कार्य अब सवालों के घेरे में आ गए हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों में हेडपंप मय सोख्ता गड्ढा निर्माण के नाम पर लाखों रुपये खर्च दर्शाए गए हैं, लेकिन कई स्थानों पर मौके पर इन कार्यों के स्पष्ट निशान तक नहीं मिले।
दस्तावेजों में जिन स्थानों पर कार्य पूर्ण दर्शाए गए हैं, उनमें लाक (डोडवाड़ी), प्यावड़ी द्वितीय, मुमाना (काशीपुरा), बिजलपुरा, सीतारामपुरा (राणोली), जयकिशनपुरा (बनवाड़ा) तथा बेगमपुरा, कंठमाना द्वितीय व तृतीय शामिल हैं। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से कई जगहों पर या तो काम अधूरा है या फिर हुआ ही नहीं।

खर्च बढ़ने से गहराया संदेह

वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रति कार्य करीब 1.24 से 1.25 लाख रुपये खर्च दिखाया गया है, जबकि 2024-25 में यही कार्य लगभग 80 हजार रुपये में किए गए थे। ऐसे में प्रति कार्य 40 से 45 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च दिखाने पर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में 100 से अधिक कार्य होने की बात सामने आई है, जिससे कुल राशि 50 से 60 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

रिकॉर्ड में पूर्ण, जमीनी हकीकत अलग

पीपलू क्षेत्र की स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्य कागजों में पूर्ण दिखाया गया है, जबकि मौके पर निर्माण अधूरा या नदारद है। इससे कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

एक ही फर्म को काम, पारदर्शिता पर प्रश्न

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप सामने आए हैं कि अधिकांश कार्य एक ही फर्म को दिए गए हैं। इससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर संदेह जताया जा रहा है।

मिलीभगत की चर्चाएं, जांच की मांग
क्षेत्र में कुछ जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पर सवाल मीडिया पड़ताल में सामने आए अंतर। मीडिया द्वारा की गई पड़ताल में दस्तावेजों और जमीनी हकीकत के बीच स्पष्ट अंतर सामने आया है। ऐसे में अब पूरे मामले की गहन जांच की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके।

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