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PATNA रोहिणी बोलीं- मुझे गंदा कहा, मारने के लिए चप्पल उठाई

ByNews Editor

Nov 16, 2025

PATNA रोहिणी का बयान सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है।

उनके अनुसार विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब दूसरे पक्ष ने उन्हें “गंदा” कहकर अपमानित किया और गुस्से में आकर मारने के लिए चप्पल तक उठा ली। रोहिणी का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्तिगत बहसबाजी नहीं थी, बल्कि लंबे समय से चल रहे आरोप-प्रत्यारोप और अविश्वास का नतीजा है।

उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने टिकट और पैसे लेकर खराब या “गंदी” किडनी दी, जो उनके मुताबिक पूरी तरह झूठ है। रोहिणी ने कहा कि यह आरोप न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि एक बेहद संवेदनशील चिकित्सा प्रक्रिया को भी गलत तरीके से पेश करता है। उनका कहना है कि उन्होंने पूरे मामले में अपना परिवार, अपने बच्चे तक की परवाह नहीं की, सिर्फ इस उम्मीद में कि किसी की जान बच सके और एक ज़रूरतमंद को समय पर मदद मिल सके।

PATNA रोहिणी ने यह भी बताया कि लगातार लग रहे आरोपों और बदनामी की वजह से वह मानसिक दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई शिकायत है तो उसका समाधान कानूनी और चिकित्सा प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए, न कि गाली-गलौज और हाथापाई की कोशिशों के ज़रिए। उनका दावा है कि उन्होंने हर कदम पर नियमों और निर्देशों का पालन किया, और अब वे चाहती हैं कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो ताकि सच्चाई सामने आ सके।

मामले ने सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर सवाल खड़े कर दिए हैं—चिकित्सा नैतिकता, अंग प्रत्यारोपण की पारदर्शिता, और व्यक्तिगत प्रताड़ना जैसे मुद्दे इस विवाद के केंद्र में हैं। रोहिणी की मांग है कि उनकी बात को भी गंभीरता से सुना जाए और बिना प्रमाण के लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यों की कसौटी पर परखा जाए।

रोहिणी ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन्हें गंदा कहा गया और इतनी हद तक अपमानित किया गया कि सामने वाले ने मारने के लिए चप्पल तक उठा ली। उनके अनुसार स्थिति सिर्फ गाली-गलौज तक नहीं रुकी, बल्कि उन पर टिकट और पैसे लेकर गंदी या खराब किडनी देने का आरोप भी लगाया गया—जो उनके मुताबिक पूरी तरह झूठा, बेबुनियाद और चरित्र हनन करने वाला आरोप है।

रोहिणी का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले में अपने परिवार, खासकर बच्चों की भी परवाह नहीं की, क्योंकि उनका उद्देश्य सिर्फ अपने दायित्व को पूरा करना और सही काम करना था। उनका दावा है कि वे लगातार मानसिक दबाव, अपमान और गलत आरोपों से जूझ रही हैं, जबकि उन्होंने हर कदम पर ईमानदारी से काम किया।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की भाषा और व्यवहार न सिर्फ अमर्यादित है, बल्कि किसी भी महिला के सम्मान के खिलाफ है। रोहिणी का मानना है कि इस घटना ने उनके आत्मसम्मान और सामाजिक छवि दोनों को चोट पहुंचाई है।

पूरा मामला अब विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले चुका है, और रोहिणी चाहती हैं कि उनकी बात बिना पक्षपात के सुनी जाए और उन्हें न्याय मिले।

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