भाटापारा। औद्योगिक इकाइयों में कार्य के दौरान हो रहे हादसों और मजदूरों की मौत ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाटापारा में करीब 15 दिनों के भीतर मिलों में दो मजदूरों की मौत होने के बाद भी उद्योगों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर जिम्मेदार विभाग की सक्रियता सवालों के घेरे में है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला उद्योग एवं सुरक्षा विभाग द्वारा मिलों और अन्य औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की जा रही है या नहीं? यदि नियमित निरीक्षण हो रहे हैं तो लगातार हादसे क्यों हो रहे हैं और श्रमिकों की जान की कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है?
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि मिलों में श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं या नहीं, मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था कैसी है और कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है या नहीं। इन बिंदुओं की गंभीरता से जांच जरूरी है।
हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले जागे प्रशासन
मजदूर की मौत के बाद जांच और कार्रवाई से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि हादसा होने से पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों की जांच, नियमों का पालन और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं। सवाल यह है कि क्या कलेक्टर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगे? क्या क्षेत्र की मिलों में विशेष सुरक्षा जांच अभियान चलाया जाएगा? और यदि कहीं लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं प्रबंधन के विरुद्ध कार्रवाई होगी?
औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन विकास की कीमत मजदूरों की जिंदगी नहीं हो सकती। सुरक्षित उद्योग और सुरक्षित श्रमिक ही वास्तविक औद्योगिक विकास की पहचान हैं।
संवाददाता — हिमांशु शुक्ला
चाणक्य न्यूज़ इंडिया, बलौदा बाजार-भाटापारा
