टोंक से एस रहमान कि रिपोर्ट।किसान महापंचायत की राजस्थान प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक 30 अप्रैल आयोजित हुई। इस बैठक में किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट, राष्ट्रीय महासचिव अकबर खान, टोंक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रोताश बोहरा, प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दी लाल यादव, प्रदेश मंत्रियों में बत्तीलाल बैरवा, मनजिंदर सिंह अटवाल एवं जगदीश जांगिड, प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश बिजारणिया, प्रदेश युवा अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य घनश्याम मीणा मलारना चौड़ आदि सम्मिलित हुए। बैठक में निम्न लिखित विषयों पर चर्चा हुई:- इस बैठक में 5 अप्रैल को किसान महापंचायत की राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी द्वारा निश्चित किये गये कार्यक्रमों “खेत को पानी- फसल को दाम- युवाओं को काम” के मंत्र की साधना हेतु समान आर्थिक हितों के आधार पर किसान मतदान करने का एक विधानसभा मे 500-500 रूपये समर्पण कर संकल्प लेने वाले 500 कार्यकर्ता तैयार करने की प्रगति का आकलन किया गया। चयनित विधानसभाओं में 31 मई 2026 तक लक्ष्य पूर्ण किया जाना है। संकल्प लेने वाले कार्यकर्ताओं को देने हेतु क्रमांक अंकित “संकल्प कैलंडर’ मुद्रित करवाने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला स्तर के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदत्त की जाने वाली समर्पण निधि की समीक्षा की गयी। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे /भारतमाला परियोजना में भूमि अधिग्रहण के विरोध में आयोजित कार्यक्रमों का वृतांत सुना गया एवं भावी कार्यक्रमों की जानकारी दी गयी। आगामी खरीफ मौसम में उर्वरकों की बिना टैगिंग के सुलभ उपलब्धता
https://youtu.be/QE9IrERMU50 सुनिश्चित करने का सरकार से आग्रह किया गया। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा टैगिंग रोकने के लिए आदेश पारित करने के उपरांत भी उर्वरक खरीद के साथ अनचाहे उत्पादो यथा नेनो यूरिया एवं नेनो डीएपी की टैगिंग नहीं रुकना खेद मिश्रित आश्चर्य है। दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत चने की दाने-दाने की खरीद के लिए राज्य सरकार को आदेशित करने हेतु कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र प्रेषित करने का निर्णय लिया गया, जिसकी प्रति प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, सहकारिता राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार, राजस्थान के सभी लोकसभा, राज्यसभा एवं विधानसभा के सदस्यों को प्रेषित कर बताया है। कि टोंक शहर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर केबिनों एवं सामानों को तोड़ने जैसे क्रूर कृत्यों की निंदा की गयी तथा अतिक्रमण हटाने की पूर्ववर्ती शर्त के रूप में पीड़ितों को रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता प्रतिपादित की गयी।
