देहरादून (Aapki Media): सरकारी लोन और स्वरोजगार योजनाओं के नाम पर जनता को दफ्तरों के चक्कर कटवाने वाले और कर्ज के नाम पर गरीबों का उत्पीड़न करने वाले बैंकों व प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों के खिलाफ देहरादून जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। गुरुवार (25 जून 2026) को ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक (DLRC/DCC) के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बैंकों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा— “जनता को बेवजह परेशान करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैंक केवल जमा जुटाने का जरिया न बनें, जिले का पैसा जिले के विकास में ही लगाना होगा।”
🛑 NBFCs को खुली चेतावनी: गरीबों का उत्पीड़न बंद करो, वरना नपोगे!
बैठक में डीएम ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को आड़े हाथों लेते हुए साफ कहा कि ऋण वितरण और फाइनेंसिंग के नाम पर अवैध तमाशा तुरंत बंद होना चाहिए:
📜 आरबीआई नियमों का हो 100% पालन: डीएम ने कहा कि लोन और रिकवरी के नाम पर किसी भी गरीब को इस कदर कर्ज के जाल में न फंसाया जाए कि उसका घर नीलाम हो जाए और वह सड़क पर आ जाए।
⚖️ बिगड़ी कानून-व्यवस्था तो खैर नहीं: ऋण वितरण या रिकवरी में किसी भी अनियमितता के कारण यदि जिले में कहीं भी कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई, तो संबंधित बैंक या फाइनेंस कंपनी के खिलाफ प्रशासन सबसे सख्त कानूनी कदम उठाएगा।
❌ बैठक से गायब बैंकों को शो-कॉज नोटिस; SBI के खराब प्रदर्शन पर भड़के DM
समीक्षा बैठक को हल्के में लेने और गायब रहने वाले बंधन बैंक, इंडसइंड बैंक और आईडीएफसी (IDFC) बैंक पर डीएम का गुस्सा फूटा। जिलाधिकारी ने घोर लापरवाही पर इन बैंकों के खिलाफ तत्काल ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show-Cause Notice) जारी करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की लचर परफॉर्मेंस पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने कहा कि एसबीआई का क्रेडिट डिपॉजिट (CD) रेशियो जिले में सबसे कम मात्र 21.73% रहा है। कृषि क्षेत्र में भी बैंक अपने लक्ष्य का सिर्फ 28.53% ऋण ही बांट सका। डीएम ने साफ किया कि जो बैंक यहाँ के लोगों की गाढ़ी कमाई जमा कर उसे बाहर निवेश कर रहे हैं, उन्हें जिला प्रशासन का कोई सहयोग नहीं मिलेगा।
📋 लोन पेंडिंग रखा या रिजेक्ट किया, तो देना होगा स्पष्ट कारण!
युवाओं और स्वरोजगार की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए डीएम ने बैंकों को गाइडलाइंस जारी की हैं:
फाइलें न अटकाएं: पीएमईजीपी, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना और आजीविका मिशन के तहत आए आवेदनों को बैंक पेंडिंग नहीं रख सकते।
रिजेक्शन का कारण बताना अनिवार्य: यदि बैंक किसी का लोन आवेदन रिजेक्ट करता है, तो उसे इसका लिखित व स्पष्ट कारण बताना होगा, ताकि आवेदक अपनी कमियों को सुधार कर दोबारा समय पर लोन पा सके।
📊 आंकड़े जो बैठक में सामने आए (Lead Bank Officer संजय भोटिया द्वारा):
📉 जिले के 6 बड़े बैंकों (SBI, PNB, यूनियन बैंक, यूसीओ, आईडीबीआई और बीओबी) का सीडी रेशियो आरबीआई के 40% के अनिवार्य मानक से भी कम है।
🏆 राहत की बात यह है कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में तय लक्ष्य 650 के मुकाबले रिकॉर्ड 751 आवेदकों को ऋण वितरित किया जा चुका है।
💳 जिले के 95.98% नागरिकों को डिजिटल लेनदेन से जोड़ा जा चुका है और 921 में से 916 एटीएम पूरी तरह एक्टिव हैं।
💬 जनता की अदालत: सरकारी योजनाओं के तहत लोन पास करवाने के नाम पर बैंकों द्वारा चक्कर कटवाने और मनमानी करने के रवैये पर आपकी क्या राय है?
अक्सर देखा जाता है कि जब कोई आम नागरिक या युवा बिजनेस शुरू करने के लिए लोन लेने बैंक जाता है, तो बैंक मैनेजर दुनिया भर के कागजात मांगकर फाइल लटका देते हैं। ऐसे में डीएम देहरादून का यह कड़ा हंटर वाकई स्वागत योग्य है।
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