जब कानून के रखवाले ही कानून को नीलाम करने लगें और रक्षक बनकर भक्षक की भूमिका निभाने लगें तो आम नागरिक का न्याय व्यवस्था पर से भरोसा उठना स्वाभाविक है. देश भर में समय-समय पर खाकी वर्दी के रक्षक से भक्षक बनने के भयानक मामले सामने आते रहे हैं. चाहे वो साल 2009 का उत्तराखंड में निर्दोष छात्र का फर्जी एनकाउंटर हो या 2020 लॉकडाउन में तमिलनाडु का चर्चित जयराज-बेनिक्स हत्याकांड. कई संगीन मामलों में अदालतों ने पुलिसकर्मियों की हैवानियत पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें फांसी तक की सजा सुनाई है. इसी काले अतीत और पुलिस सुधारों की भारी जरूरत के बीच बिहार के गोपालगंज में एसपी विनय कुमार की सख्त कार्रवाई ने एक बार फिर थानों में चल रहे वसूली और फर्जीवाड़े के रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है.
बिहार के गोपालगंज जिले में जादोपुर थानेदार अनिल कुमार राम और उनके सहयोगियों ने गांजे की बरामदगी की आड़ में बेतिया से गाय खरीदने आई एक महिला और उसकी बेटी समेत निर्दोषों को करीब 36 घंटे तक गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा और 1.80 लाख रुपये की अवैध उगाही की. इस मामले में शिकायत मिलने पर एसपी साहब ने डीएसपी से निष्पक्ष जांच कराई और आरोप साबित होते ही अपने ही थानेदार, चालक, चौकीदार और बिचौलिये को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया.देश में पुलिस सुधार को लेकर कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए लेकिन इच्छाशक्ति की कमी के कारण वे अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो सके हैं:
चाणक्य न्यूज़ इंडिया के लिए
अनिल कुमार चौधरी
