कभी थी झिझक, आज अपने काम पर है गर्व, मणि-कंचन केंद्र ने बदली सरिता की जिंदगी
बलौदाबाज़ार, 22 सितंबर 2026। नगर पालिका परिषद बलौदाबाज़ार के मणि-कंचन केंद्र में स्वच्छता दीदी के रूप में कार्यरत सरिता नवरत्न की कहानी बदलाव, आत्मविश्वास और सम्मान की प्रेरणादायक मिसाल बन रही है। कभी इस काम को लेकर उनके मन में झिझक थी, लेकिन कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया को समझने के साथ उनके भीतर अपने काम के प्रति सम्मान और गर्व की भावना बढ़ती गई।
सरिता का कहना है कि आज यह काम उनके लिए केवल रोजगार का साधन नहीं है, बल्कि शहर को स्वच्छ और बेहतर बनाने में योगदान देने का माध्यम है। शहर की स्वच्छता में अपनी भूमिका निभाने पर उन्हें गर्व महसूस होता है और यही भावना उन्हें प्रतिदिन पूरी लगन एवं समर्पण के साथ काम करने के लिए प्रेरित करती है।
कचरे के बेहतर प्रबंधन में अहम भूमिका
मणि-कंचन केंद्र में सॉलिड एवं लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं। यहां जैविक कचरे से खाद तैयार की जाती है, जबकि अजैविक कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर उसके उचित निपटारे की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
सरिता जैसी स्वच्छता दीदियां कचरे के पृथक्करण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनके कार्य से न केवल स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर भी मिल रहा है।
सरिता नवरत्न की कहानी यह संदेश देती है कि जब काम को जिम्मेदारी और सम्मान की भावना से किया जाए, तो वही काम व्यक्ति के आत्मविश्वास और पहचान का आधार बन जाता है।
चाणक्य न्यूज़ इंडिया
हिमांशु शुक्ला, बलौदाबाज़ार-भाटापारा
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