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सीमा सुरक्षा से सामाजिक सरोकार तक, विश्वास की नई इबारत लिख रही एसएसबी

ByAshok Mishra

Sep 27, 2026

47वीं वाहिनी ने गांधी जयंती से पहले बच्चों के बीच कराया निबंध प्रतियोगिता का आयोजन

 

चाणक्य न्यूज़ इंडिया | रक्सौल
श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर

 

रक्सौल। भारत-नेपाल की खुली सीमा की सुरक्षा का दायित्व संभालने वाली सशस्त्र सीमा बल अब केवल चौकियों और सीमा निगरानी तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार आयोजित सामाजिक, शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से एसएसबी स्थानीय लोगों और नई पीढ़ी के साथ विश्वास और सहभागिता का रिश्ता भी मजबूत कर रही है।

इसी कड़ी में 27 सितंबर को 47वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, रक्सौल की ओर से आगामी गांधी जयंती के अवसर पर बलकर्मियों के बच्चों के लिए निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को महात्मा गांधी के जीवन, सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया।

बच्चों ने ‘महात्मा गांधी का सपना’, ‘स्वच्छ भारत में मेरा योगदान’, ‘सोशल मीडिया का प्रभाव और दुष्प्रभाव’, ‘देश प्रेम’, ‘स्वच्छ भारत मिशन’ तथा ‘एआई के उपयोग और चुनौतियां’ जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।

सीमा की चौकसी के साथ समाज से संवाद

सीमावर्ती क्षेत्रों में एसएसबी की भूमिका समय के साथ एक व्यापक सामाजिक स्वरूप भी ग्रहण करती दिखाई दे रही है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के साथ बल की ओर से समय-समय पर बच्चों, युवाओं, ग्रामीणों और सीमावर्ती समुदायों को जोड़ने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।

ऐसे आयोजनों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सीमा सुरक्षा केवल भौगोलिक सीमा की निगरानी तक सीमित नहीं होती। स्थानीय नागरिकों का विश्वास, प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ संवाद तथा नई पीढ़ी में राष्ट्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत सीमा प्रबंधन का महत्वपूर्ण आधार बनती है।

भरोसे की सीमा भी मजबूत

एसएसबी की ऐसी पहल एक सकारात्मक संदेश देती है कि वर्दी और समाज के बीच दूरी नहीं, बल्कि विश्वास का रिश्ता होना चाहिए। सीमाई क्षेत्रों में जब सुरक्षा बल बच्चों के बीच शिक्षा की बात करते हैं, युवाओं को जागरूक करते हैं और ग्रामीण समाज के साथ संवाद स्थापित करते हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था को भी सामाजिक सहयोग की मजबूत नींव मिलती है।

47वीं वाहिनी का यह आयोजन इसी व्यापक सोच का हिस्सा माना जा सकता है—जहां एक ओर सीमा की निगरानी है, वहीं दूसरी ओर समाज के साथ संवेदनशील और भरोसेमंद संबंध बनाने का प्रयास भी लगातार जारी है।

यही पहल आने वाले समय में भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में एसएसबी और स्थानीय समाज के बीच विश्वास, सहयोग और राष्ट्रीय दायित्व की भावना को और मजबूत कर सकती है।

By Ashok Mishra

Ashok Mishra is the Editor-in-Chief of Chanakya News India, a Hindi digital news platform established in 2012. The organization focuses on delivering verified breaking news, live news coverage, crime, entertainment, business, technology, and regional updates across India. Address: FNG vihar 2 sector 121 Gautam budhnagar Uttar pradesh, India Email -mpcgchanakyanewsindia@gmail.com Phone– +91 9315744968