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पश्चिम बंगाल में परिवर्तन और विकास के संदेश के साथ राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी की पत्रकार वार्ता

ByNews Editor

Apr 26, 2026

आज भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कोलकाता में एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर उनके साथ भाजपा के प्रदेश मीडिया संयोजक प्रोफेसर बिमल शंकर नंदा एवं सह-संयोजक चंद्रशेखर बसोटिया उपस्थित थे। साथ ही प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता श्री देवजीत सरकार भी उपस्थित रहे।
पत्रकार वार्ता में डॉ. त्रिवेदी ने कई महत्वपूर्ण विषयों को उठाया।

कार्यक्रम की शुरुआत में श्री देवजीत सरकार ने कहा कि पश्चिम बंगाल इस समय एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। 34 वर्षों के वाम शासन और पिछले 15 वर्षों के तृणमूल कांग्रेस के ‘अत्याचार और भ्रष्टाचार’ से त्रस्त जनता अब मुक्ति का मार्ग तलाश रही है।

इसके पश्चात डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने अपना वक्तव्य रखा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल का चुनाव अब अपने अंतिम चरण की ओर और एक निर्णायक परिणाम की दिशा में बढ़ रहा है। इसके साथ ही राज्य की जनता का संकल्प भी परिवर्तन के पक्ष में दृढ़ होता जा रहा है। लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में संस्थागत भ्रष्टाचार, अपराधियों का दबदबा और खतरनाक तुष्टिकरण—इन तीनों ने मिलकर राज्य के विकास को बाधित किया है और समाज में भय एवं असुरक्षा का वातावरण बनाया है। अब पश्चिम बंगाल की जनता भय के अंधकार से बाहर निकलकर विश्वास के साथ भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में निर्णायक जनादेश देने के लिए तैयार है।

सबसे पहले मैं इस पवित्र भूमि को नमन करता हूं, जहां से हमारे राष्ट्रवाद के दो महान स्वर—राष्ट्रीय गान “जन गण मन” और राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्”—उद्भूत हुए हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि इस चुनाव में राष्ट्रवाद की यह सशक्त ध्वनि पुनः इसी भूमि से उठेगी और पूरे भारत में गूंजेगी।

एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के नागरिकों में यह विश्वास जगाया है कि हम उस विकास की धारा को पुनः स्थापित करेंगे, जिसमें कभी यह राज्य अग्रणी था। बचपन में हम सुनते थे—“झुलनी ने मारा धक्का, बालम कोलकाता पहुंच गए रे”—अर्थात कोलकाता विकास, उद्योग, अर्थव्यवस्था और रोजगार का केंद्र हुआ करता था। आज वह स्थिति बदल गई है और उसे फिर से सही दिशा में लाना होगा।

एक ओर केंद्र सरकार ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला आरक्षण विधेयक लाया, वहीं दूसरी ओर इसके पारित न होने पर विपक्ष ने जो उत्सव मनाया, वह कई सवाल खड़े करता है। वह हंसी हर महिला के मन को आहत करती है और उसका जवाब भविष्य में अवश्य मिलेगा।

एक ओर हमारी सरकार ने मुद्रा योजना, उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया है। वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल सरकार कहती है कि महिलाओं को शाम के बाद बाहर नहीं निकलना चाहिए। अपराध के मामलों में पश्चिम बंगाल में सजा की दर देश में सबसे कम है—जहां पूरे भारत में यह लगभग 22% है, वहीं पश्चिम बंगाल में लगभग 3% है।

मैं एक उदाहरण देना चाहता हूं—हमारी पार्टी की उम्मीदवार रत्ना देवनाथ, जो आरजी कर कॉलेज की दुखद घटना की पीड़िता की मां का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर उस घटना के आरोपी के परिवार का सदस्य चुनाव लड़ रहा है। इन दोनों की तुलना से स्पष्ट हो जाता है कि कहां भय है और कहां विश्वास की संभावना है।

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कई उद्योग राज्य छोड़कर चले गए हैं और भ्रष्टाचार के अनेक मामले सामने आए हैं। मैं तृणमूल कांग्रेस से एक प्रश्न पूछना चाहता हूं—हमने अपने घोषणा पत्र का नाम “भरोसे का संकल्प पत्र” रखा है, लेकिन उन्होंने अपने घोषणा पत्र का नाम “इश्तिहार” क्यों रखा है? “इश्तिहार” कोई बंगाली शब्द नहीं है, यह अरबी-फारसी मूल का शब्द है। इसके पीछे कौन सी मानसिकता काम कर रही है? 1905 में नवाब कलीमुल्लाह ने भी अपने प्रकाशन का नाम “इश्तिहार” रखा था। क्या वही मानसिकता यहां भी झलकती है?

हम स्पष्ट कहना चाहते हैं कि हमारी सरकार बनने पर 5 वर्षों में 1 करोड़ रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। उद्योग स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जाएगा। महिलाओं को ₹3000 मासिक भत्ता दिया जाएगा और उनकी सुरक्षा के लिए मातंगिनी हाजरा और रानी रश्मोनी के नाम पर विशेष महिला बटालियन का गठन किया जाएगा।

विकास के मामले में जहां पूरा देश आगे बढ़ रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल में बाधाएं उत्पन्न की गई हैं। इसलिए हमारे संकल्प पत्र में यह शामिल है कि 45 दिनों के भीतर बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा किया जाएगा। साथ ही “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” नीति के तहत अवैध घुसपैठ को रोका जाएगा।

यह चुनाव केवल एक राज्य का चुनाव नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। हमें विश्वास है कि राष्ट्रवाद की धारा अब गंगोत्री से गंगासागर तक अविरल बहेगी। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार से होते हुए यह धारा अब बंगाल में प्रवेश करेगी और इसे कोई रोक नहीं पाएगा।

अंग, बंग और कलिंग—इन ऐतिहासिक क्षेत्रों में बंगभूमि का महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमें पूर्ण विश्वास है कि विकास और राष्ट्रवाद की यह लहर अब बंगाल में अवश्य उठेगी। जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जो इस भूमि के पुत्र थे, उनके सपनों को साकार करने का समय आ गया है।

हम कोलकाता और पश्चिम बंगाल को विकास की ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। पूर्वी भारत की नदियों को गहरा कर इनलैंड वॉटरवेज शुरू किए गए हैं, 100 से अधिक राष्ट्रीय जलमार्ग अब संचालित हैं। हावड़ा बंदरगाह की क्षमता 130% तक बढ़ाने की योजना है। वाराणसी से रांची होते हुए कोलकाता तक छह लेन एक्सप्रेसवे 2027 तक पूरा किया जाएगा।

अर्थात एक ओर विकास के नए द्वार खुल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भय और अनिश्चितता का रास्ता बंद हो रहा है।

और मैं यह भी कहना चाहता हूं कि एक ओर पश्चिम बंगाल की जनता ने 30 वर्षों तक कांग्रेस को मौका दिया, 6–7 बार कम्युनिस्ट पार्टी को मौका दिया और 3 बार तृणमूल कांग्रेस को मौका दिया—अब एक बार भाजपा को अवसर दें, और निश्चित रूप से परिवर्तन का स्वरूप स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

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