टोंक/उनियारा। जिले के उनियारा सर्किल क्षेत्र में इन दिनों अपराध और अवैध गतिविधियों को लेकर हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अलीगढ़, बनेठा, सोप, नगरफोर्ट और उनियारा थाना क्षेत्रों में अवैध खनन, अवैध परिवहन, अवैध शराब बिक्री, जुआ-सट्टा, मादक पदार्थों की तस्करी-बिक्री और साइबर ठगी जैसी गतिविधियां खुलेआम संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके साथ ही चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। क्षेत्र के लोगों के अनुसार, विशेष रूप से अलीगढ़ और बनेठा क्षेत्र में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहां अपराधी तत्वों के हौसले बुलंद हैं और आमजन खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिम्मेदार विभागों की ढिलाई और कथित संरक्षण के चलते दलालों और माफियाओं का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो विभिन्न अवैध गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित कर रहा है। चौथ वसूली व हफ्ता वसूली से पनप रहे ये गोरखधंधे आमजन को जरूर नजर आ रहे हैं लेकिन जिम्मेदार सब कुछ देखकर भी चुप्पी साधे हुए हैं। इसमें कुछ सरकारी कार्मिकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो अवैध चौथ वसूली इस पूरे तंत्र की मुख्य कड़ी बनी हुई है, जिसके जरिए अवैध कारोबार को संरक्षण और विस्तार मिल रहा है। बीते महीनों में भी चौथ वसूली और सांठगांठ के कई मामले सामने आने की चर्चाएं रही हैं। वहीं बजरी व पत्थर व्यवसाय से जुड़े लोगों से बातचीत करने पर उनका कहना हैं कि सरकारी तंत्र द्वारा अवैध चौथ वसूली के चलते निर्माण कार्यों के लिए जरूरी बजरी और पत्थर महंगे दामों पर मिलने से लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जिसका सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है। वहीं, स्थानीय पुलिस की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि पुलिस अपराधियों और अवैध गतिविधियों के प्रति नरमी बरत रही है, जबकि निर्दोष और आम लोगों पर सख्ती दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जा रहा है। हाल ही के दिनों में ऐसे कुछ मामलों की चर्चाएं भी सामने आई हैं, जिससे जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है। क्षेत्रवासियों द्वारा बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले से जुड़े पुख्ता साक्ष्य और लाइव प्रमाण जल्द सार्वजनिक किए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो न केवल अवैध कारोबार में शामिल तत्वों, बल्कि कथित रूप से संरक्षण देने वाले अधिकारियों और कार्मिकों की भूमिका भी उजागर हो सकती है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस महकमा इन गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। क्षेत्रवासियों की नजरें अब प्रशासनिक जवाबदेही और ठोस कार्रवाई पर टिकी हैं।
