
चंद्र प्रकाश पुरोहित ब्यूरो प्रमुख जैसलमेर जयपुर डिक्लेरेशन केवल दस्तावेज नहीं, ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता : शेखावत
– ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री
– कहा, ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ से विश्व पर्यटन के मानचित्र पर बढ़ेगी जयपुर की पहचान
– कहा, भारत आने वाले विदेशी पर्यटक औसतन 18 दिन यहां ठहरते हैं
जयपुर, 21 अगस्त। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भारत दुनिया के पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल है। भारत आने वाले विदेशी पर्यटक औसतन 18 दिन यहां ठहरते हैं। भारत की विशालता और विविधता को देखते हुए इस अवधि को और बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स टूरिज्म मिनिस्टर्स कम्युनिकेशन को अंतिम रूप देकर ‘जयपुर डायलॉग’ और ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ का नाम दिया गया है। किसी अंतरराष्ट्रीय घोषणा से जयपुर का नाम जुड़ना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ से जयपुर की वैश्विक पर्यटन पहचान को मजबूती मिलेगी। उन्होंने
शुक्रवार को ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत के पर्यटन क्षेत्र के लिए ब्रिक्स जैसे आयोजनों से नई संभावनाएं पैदा होंगी। कोविड के बाद भारत का पर्यटन क्षेत्र प्री-कोविड स्तर को पार कर चुका है और कई मामलों में उससे आगे निकल गया है। उन्होंने कहा कि भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है। विशाल देश होने के कारण घरेलू पर्यटन की भी व्यापक संभावनाएं हैं। पिछले दस वर्षों में देश में घरेलू पर्यटन में तीन गुने से अधिक की वृद्धि हुई है। शेखावत ने कहा कि पिछले एक दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, अर्थव्यवस्था की वृद्धि, करों में कमी से डिस्पोजेबल इनकम बढ़ने और महंगाई को नियंत्रित रखने के प्रयासों से घरेलू पर्यटन को गति मिली है।
उन्होंने कहा कि ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन सहयोग के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसका उद्देश्य बैठकों और चर्चाओं तक सीमित रहना नहीं, बल्कि पर्यटन, अर्थव्यवस्था, रोजगार, स्थानीय समुदायों और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने वाले ठोस और परिणाम आधारित कदम उठाना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगले वर्ष चीन में ब्रिक्स की बैठकें होने और पर्यटन ट्रैक पर चर्चा के बाद भी ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ के फैसलों के संदर्भ में जयपुर का नाम सामने आएगा। इससे जयपुर की वैश्विक पर्यटन पहचान और राजस्थान के पर्यटन क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
एआई, सतत पर्यटन और स्किलिंग पर फोकस
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत पर्यटन ट्रैक की थीम ‘बिल्डिंग फॉर रिजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ रखी गई। इसका उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र को अधिक सक्षम और लचीला बनाना, नवाचार को बढ़ावा देना तथा स्थिरता और जिम्मेदार पर्यटन को प्राथमिकता देना है। उन्होंने कहा कि जयपुर में हुई बैठक में चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर सदस्य देशों ने चर्चा की। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यटन, सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन, स्किलिंग एवं कैपेसिटी बिल्डिंग तथा टूरिज्म एक्सचेंज और सीमलेस ट्रैवल फैसिलिटेशन शामिल हैं।
पर्यटन में भी होगा एआई का उपयोग
एआई के संबंध में शेखावत ने कहा कि इसका प्रभाव जीवन के लगभग हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पर्यटन क्षेत्र में एआई के उपयोग और इसे प्रभावी ‘एनैबलर’ के रूप में इस्तेमाल करने पर चर्चा हुई।सतत और जिम्मेदार पर्यटन को लेकर उन्होंने कहा कि भारत सहित दुनिया के कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण स्थिरता से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसलिए पर्यटन को पर्यावरण और स्थानीय परिस्थितियों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने की जरूरत है। स्किलिंग के संबंध में उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में पर्यटकों की संख्या और पर्यटक यात्राओं में तीन गुने से अधिक वृद्धि हुई है। इसके साथ हॉस्पिटैलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा ट्रैवल और टूरिज्म क्षेत्र में अवसर भी बढ़े हैं। बढ़ती मांग के अनुरूप पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को नए कौशल उपलब्ध कराना जरूरी है। चौथी प्राथमिकता के तहत ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने और यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव देने पर जोर दिया गया।
निवेश, डेटा और बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने पर सहमति
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि जयपुर डिक्लेरेशन में ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन सहयोग का विस्तृत फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसमें एआई, जिम्मेदार एवं मानव-केंद्रित पर्यटन, स्किलिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा पर्यटन को बढ़ावा देने, निवेश बढ़ाने, डेटा साझा करने और विभिन्न देशों की बेस्ट प्रैक्टिस के आदान-प्रदान को आसान बनाने पर सहमति बनी है। अलग-अलग पर्यटन उत्पादों के विकास और व्यावहारिक सहयोगात्मक पहलों को आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इन पहलों का लाभ पर्यटन उद्योग के साथ स्थानीय समुदायों और आम नागरिकों तक भी पहुंचना चाहिए। शेखावत ने कहा कि ब्रिक्स बैठकों में लिए गए निर्णय केवल कॉन्फ्रेंस हॉल तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इनका उद्देश्य दुनिया से आने वाले पर्यटकों को भारत की संस्कृति और विविधता को समझने तथा उसका अनुभव करने का अवसर देना भी है। उन्होंने कहा कि पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने, अवसर पैदा करने और समुदायों को सशक्त बनाने के साथ विभिन्न देशों के लोगों और सभ्यताओं को करीब लाने का माध्यम होना चाहिए।
ब्रिक्स प्रतिनिधियों ने देखी जयपुर की विरासत
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 19 अगस्त को पर्यटन कार्य समूह की बैठक के बाद विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों को जयपुर की विरासत और संस्कृति से परिचित कराया गया। ब्रिक्स देशों के मंत्रियों के लिए हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर किले के भ्रमण की व्यवस्था की गई। प्रतिनिधियों को राजस्थान की पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तकला का भी अनुभव कराया गया। इस दौरान पेंटिंग, बगरू प्रिंटिंग, वीविंग, लाख की चूड़ी बनाने तथा मिट्टी और पेपर मैशी से उत्पाद बनाने जैसी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन किया गया। शेखावत ने कहा कि भारत में पर्यटन केवल स्मारकों के भ्रमण तक सीमित नहीं है। यह संस्कृति को जानने, पहचानने और उसका अनुभव करने का माध्यम भी है। विदेशी पर्यटकों को भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और विविध विरासत से परिचित कराने में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है।
भारत से लगभग सभी देशों के लिए ई-वीजा
शेखावत ने कहा कि भारत ने लगभग सभी देशों के लिए ई-वीजा प्रोटोकॉल शुरू किया है। भारत में मेडिकल टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, सामान्य पर्यटन और बिजनेस सहित विभिन्न श्रेणियों के वीजा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। कुछ देशों को छोड़कर आवेदकों को भारतीय दूतावास जाने की जरूरत नहीं है। कई मामलों में 48 घंटे में वीजा मिलने की सुविधा भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान चीन के मंत्री ने जानकारी दी कि चीन ने 55 देशों के नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त प्रवेश की व्यवस्था लागू की है। शेखावत ने कहा कि प्रत्येक देश अपनी परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के आधार पर यात्रा सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जयपुर डिक्लेरेशन में किसी साझा वीजा एग्रीमेंट या वीजा-ऑन-अराइवल व्यवस्था का निर्णय नहीं हुआ है। सदस्य देशों के बीच यात्रा को अधिक सुगम बनाने पर सहमति बनी है, जबकि प्रत्येक देश अपनी वीजा नीति स्वयं तय करेगा।
घोषणाओं को परिणाम आधारित बनाने पर जोर
शेखावत ने कहा कि ब्रिक्स की बैठकों को केवल चर्चा तक सीमित रखने के बजाय डिलीवरी-बेस्ड और आउटकम-बेस्ड बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन रहा है कि घोषणाओं के ठोस परिणाम सामने आने चाहिए।
उन्होंने संस्कृति के क्षेत्र में काशी में हुए डिक्लेरेशन का उदाहरण देते हुए कहा कि उसके तय विषयों पर जी-20 में पिछले तीन वर्षों से काम किया जा रहा है। हाल में संस्कृति मंत्रियों की बैठक में भी डिलीवेरेबल्स तय किए गए हैं। …
उन्होंने कहा कि जयपुर डिक्लेरेशन में भी मापने योग्य और गणना योग्य परिणाम हासिल करने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी है। इसके लिए सदस्य देशों के बीच गठित समूहों तथा पहले से मौजूद सांस्कृतिक और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े अकादमिक एवं अन्य समझौतों का इस्तेमाल किया जाएगा।
विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी चर्चा
शेखावत ने बताया कि ब्रिक्स देशों के बीच विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संपत्तियों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। इसमें संरक्षण के क्षेत्र में एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने और दूसरे देशों में गई सांस्कृतिक संपत्तियों को वापस लाने के लिए सहयोग जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कलाकारों के आदान-प्रदान की दिशा में भी पहल की जा रही है। भोपाल में आयोजित संस्कृति मंत्रियों के सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों की रिपॉजिटरी तैयार करने वाले प्लेटफॉर्म पर सहमति बनी थी, जिससे कलाकारों को दूसरे देशों में आमंत्रित किया जा सके।
पर्यटन नीति में डेटा की भूमिका महत्वपूर्ण
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डेटा अब केवल किसी पर्यटन स्थल को लोकप्रिय बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि नीति निर्माण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन संबंधी डेटा और बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने से सदस्य देश एक-दूसरे की सफल पहलों से सीख सकेंगे और पर्यटन क्षेत्र के लिए बेहतर नीतियां तैयार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के मंत्री और प्रतिनिधि जयपुर में बैठक के साथ राजस्थान की विरासत, कला, संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव लेकर लौटेंगे। इससे जयपुर और राजस्थान की पर्यटन पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
शेखावत ने कहा कि जयपुर डिक्लेरेशन केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन सहयोग को व्यावहारिक रूप देने की साझा प्रतिबद्धता है। इसके जरिए अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने, नए अवसर पैदा करने, स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और विभिन्न देशों के लोगों तथा सभ्यताओं को करीब लाने की दिशा में काम किया जाएगा।
ओवरटूरिज्म से निपटने के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट
शेखावत ने कहा कि जयपुर को ओवरटूरिज्म का ‘विक्टिम’ नहीं माना जा सकता, लेकिन जयपुर सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के बढ़ते दबाव से जुड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई प्रमुख पर्यटन स्थल ओवरटूरिज्म का सामना कर रहे हैं। इसी कारण ब्रिक्स बैठक में जिम्मेदार पर्यटन और स्थिरता के मुद्दे पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि भारत सरकार विभिन्न राज्यों के साथ प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन और संबंधित प्राधिकरण विकसित करने पर चर्चा कर रही है। उन्होंने गुजरात के एकता नगर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां डेस्टिनेशन मैनेजमेंट व्यवस्था को अधिकार, जिम्मेदारियां और शक्तियां दी गई हैं। इससे स्थिरता, जिम्मेदार पर्यटन, पर्यटन वृद्धि और डेस्टिनेशन मैनेजमेंट से जुड़े मुद्दों पर समग्र रूप से काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एकता नगर के अनुभव के आधार पर देश के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी इस मॉडल को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।
