डीआईजी के. रंजीत ने महुआवा व वाहिनी मुख्यालय का किया भ्रमण; जवानों को साइबर सुरक्षा और हनी ट्रैप से सतर्क रहने के निर्देश
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | विशेष रिपोर्ट
श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर
मोतिहारी। सशस्त्र सीमा बल की 71वीं वाहिनी, मोतिहारी में 21 और 22 सितंबर को सीमा सुरक्षा, जवानों की सतर्कता, ग्रामीण संवाद, आधुनिक कृषि और युवा प्रेरणा से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए। सीमांत मुख्यालय पटना के उप महानिरीक्षक के. रंजीत ने समवाय महुआवा और वाहिनी मुख्यालय का भ्रमण कर अधिकारियों, जवानों, पंचायत प्रतिनिधियों, किसानों और छात्र-छात्राओं से संवाद किया।
21 सितंबर को समवाय महुआवा पहुंचने के बाद सैनिक दरबार आयोजित किया गया। इसमें उप महानिरीक्षक ने अधिकारियों एवं कार्मिकों को सीमा सुरक्षा, अनुशासन और बदलती सुरक्षा चुनौतियों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने जवानों को विशेष रूप से साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया के इस्तेमाल और हनी ट्रैप जैसे खतरों से सतर्क रहने की सलाह दी। साथ ही खेलकूद और शारीरिक सक्रियता को भी महत्वपूर्ण बताया।
सैनिक दरबार के दौरान यह संदेश दिया गया कि मौजूदा समय में सुरक्षा केवल सीमा पर गश्त तक सीमित नहीं है। डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के कारण सुरक्षा बलों के लिए साइबर सतर्कता भी जरूरी हो गई है।
सीमावर्ती गांवों की समस्याओं पर चर्चा
महुआवा प्रवास के दौरान उप महानिरीक्षक ने पंचायत प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की।
महुआवा पंचायत के मुखिया संतोष गिरि एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र की स्थिति, स्थानीय समस्याओं और ग्रामीणों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण साझेदार माने जाते हैं। स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी और सुरक्षा बलों के साथ उनका समन्वय सीमा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने में मदद करता है।
किसानों को आधुनिक खेती अपनाने की सलाह
ग्रामीणों के साथ संवाद के दौरान किसानों को आधुनिक और प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
किसानों को मृदा परीक्षण, मत्स्य पालन, बागवानी, पुष्पकृषि और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई और इन्हें आय बढ़ाने के विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सीमावर्ती क्षेत्रों में कृषि लोगों की आजीविका का प्रमुख आधार है। ऐसे में पारंपरिक खेती के साथ नई कृषि तकनीकों और वैकल्पिक कृषि व्यवसायों को अपनाने से किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है।
विद्यार्थियों से भी किया संवाद
22 सितंबर को उप महानिरीक्षक के. रंजीत ने 71वीं वाहिनी मुख्यालय का भ्रमण किया।
इस दौरान पंडित दीन दयाल उपाध्याय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं से बातचीत की गई।
विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रसेवा के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
युवाओं से कहा गया कि वे अपनी शिक्षा को केवल रोजगार तक सीमित न रखें, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी अपनी भूमिका सुनिश्चित करें।
पिपराकोठी कृषि अनुसंधान संस्थान का भी किया भ्रमण
दौरे के दौरान उप महानिरीक्षक ने महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, पिपराकोठी का भी भ्रमण किया।
यहां कृषि अनुसंधान और ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के उपयोग से संबंधित गतिविधियों का अवलोकन किया गया।
सीमा सुरक्षा के साथ सामाजिक जुड़ाव पर जोर
71वीं वाहिनी के दो दिवसीय कार्यक्रम में सीमा सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता भी प्रमुख रूप से दिखाई दी।
एक ओर जवानों को साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया और हनी ट्रैप जैसे खतरों के प्रति सतर्क किया गया, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों और किसानों से संवाद कर विकास और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया गया।
छात्र-छात्राओं के बीच अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रसेवा की बात रखी गई।
भारत-नेपाल की खुली सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल के लिए स्थानीय नागरिकों के साथ बेहतर समन्वय हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे कार्यक्रम सीमा सुरक्षा और समाज के बीच विश्वास को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।
‘इकहत्तर: सबसे बेहतर’
71वीं वाहिनी का यह दो दिवसीय कार्यक्रम सुरक्षा, सतर्कता, सामाजिक सहभागिता और ग्रामीण विकास का साझा संदेश लेकर सामने आया।
सीमा पर सजग जवान, गांवों से मजबूत संवाद, आधुनिक खेती की ओर बढ़ते किसान और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित युवा—यही 71वीं वाहिनी की इस पहल की सबसे बड़ी पहचान रही।
