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सीमा नहीं, भरोसे की साझी जिम्मेदारी: रक्सौल में भारत–नेपाल ने मजबूत किया सुरक्षा और सहयोग का संकल्प

ByAshok Mishra

Sep 24, 2026

आईसीपी रक्सौल में जिला स्तरीय सीमा समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक; तस्करी, सीमा पार अपराध और संदिग्ध गतिविधियों पर संयुक्त कार्रवाई व सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर जोर

खुली सीमा दोनों देशों की ऐतिहासिक निकटता की पहचान, अधिकारियों का संदेश—अपराध के लिए नहीं बनने दी जाएगी इसकी सहजता

चाणक्य न्यूज़ इंडिया | विशेष कवर स्टोरी
श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर

रक्सौल। भारत और नेपाल के बीच की सीमा केवल दो देशों की भौगोलिक रेखा नहीं है। इसके दोनों ओर बसे लाखों लोगों के रिश्ते, व्यापार, संस्कृति, भाषा, रोजी-रोटी और पारिवारिक संबंध एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसी ऐतिहासिक निकटता को सुरक्षित रखते हुए सीमा पार अपराध और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से रक्सौल स्थित एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) में भारत–नेपाल जिला स्तरीय सीमा समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में नेपाल के सीमावर्ती पर्सा एवं बारा जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र स्पष्ट था—भारत–नेपाल की खुली सीमा मित्रता और जनसंपर्क की ताकत बनी रहे, लेकिन अपराधी और तस्कर इस सहज व्यवस्था का दुरुपयोग न कर सकें।

बैठक की संयुक्त अध्यक्षता पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी और नेपाल के पर्सा जिले के मुख्य जिला अधिकारी ने की। दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार संपर्क तथा सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

जाली नोट से मादक पदार्थ तक—साझी चुनौती पर साझा रणनीति

बैठक में जाली भारतीय मुद्रा, अवैध हथियार, मादक एवं नशीले पदार्थों की तस्करी, शराब, तंबाकू तथा अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की अवैध आवाजाही पर विस्तार से चर्चा की गई।

इसके साथ ही सीमा पार अपराध में सक्रिय गिरोहों, वांछित अपराधियों की धर-पकड़, विदेशी एवं संदिग्ध नागरिकों की अवैध आवाजाही और सीमा क्षेत्र में होने वाली अवांछित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए दोनों देशों की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर सहमति बनी।

बैठक का महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि सीमा के एक ओर हुई आपराधिक गतिविधि को केवल एक देश की समस्या मानकर नहीं देखा जा सकता। अपराधी सीमा बदल सकता है, लेकिन उसे रोकने वाली एजेंसियों के बीच सूचना और विश्वास की दीवार नहीं होनी चाहिए।

अपराध के विरुद्ध समन्वय, नागरिकों के लिए सहज सीमा

भारत और नेपाल के संबंधों की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनकी खुली सीमा और गहरे जनस्तरीय संबंध शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संपर्क के साथ लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन, सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, जल संसाधन और परिवहन सहित विभिन्न क्षेत्रों में 40 से अधिक संस्थागत द्विपक्षीय तंत्र कार्यरत हैं।

यही कारण है कि रक्सौल की यह बैठक केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी प्रशासनिक बैठक नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश भी है जिसमें सामान्य नागरिक, व्यापारी और दोनों देशों के पारिवारिक-सामाजिक रिश्ते सहज बने रहें, जबकि अपराधियों के लिए सीमा का दुरुपयोग कठिन होता जाए।

राष्ट्रीय स्तर की नीति का स्थानीय स्वरूप बना रक्सौल

सीमा जिलों के बीच नियमित संवाद राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भारत–नेपाल सीमा प्रबंधन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मार्च 2025 में आयोजित भारत–नेपाल सीमा प्रबंधन संयुक्त कार्य समूह की बैठक में भी दोनों देशों ने सीमा पार अपराध, आईसीपी सहित सीमा आधारभूत संरचना, सुरक्षा संस्थाओं की क्षमता और सीमा जिला समन्वय समितियों के कामकाज को मजबूत करने पर चर्चा की थी।

फरवरी 2026 में आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संबंधी समझौते से जांच, अभियोजन तथा सीमा पार अपराधों के विरुद्ध कानूनी सहयोग को और मजबूत करने का संस्थागत आधार मिला है।

ऐसे में रक्सौल में हुई जिला स्तरीय बैठक को राष्ट्रीय स्तर के सहयोग को जमीन पर लागू करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा सकता है।

सूचना ही सीमा सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत

खुली और अत्यधिक आवागमन वाली भारत–नेपाल सीमा पर केवल चौकियों और तलाशी के माध्यम से अपराध रोकना पर्याप्त नहीं है। प्रभावी सूचना तंत्र, संदिग्ध गतिविधियों की समय पर जानकारी, वांछित अपराधिय

का विवरण और दोनों तरफ की पुलिस तथा सुरक्षा एजेंसियों के बीच तत्काल संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बैठक में इसी कारण इंटेलिजेंस और सूचना साझेदारी को विशेष महत्व दिया गया। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच नियमित संवाद अपराधियों के लिए उपलब्ध उस अवसर को कम कर सकता है जिसमें वे सीमा पार कर जांच से बचने की कोशिश करते हैं।

रिश्तों की असली ताकत—सरकार से आगे जनता तक

भारत और नेपाल के संबंधों की विशेषता यह भी है कि ये केवल राजधानी स्तर की कूटनीति पर निर्भर नहीं हैं। रक्सौल–वीरगंज जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजाना होने वाला सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक संपर्क इस संबंध को जीवंत बनाए रखता है।

किसी परिवार के रिश्तेदार सीमा के दूसरी ओर हैं, किसी का कारोबार जुड़ा है, कोई शिक्षा या स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आता-जाता है तो हजारों लोगों की आजीविका सीमापार व्यापार से संबंधित है।

इसलिए सीमा सुरक्षा की नीति का उद्देश्य सामान्य आवागमन में अनावश्यक बाधा पैदा करना नहीं, बल्कि वैध आवाजाही को सुरक्षित और अपराध की आवाजाही को कठिन बनाना है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने भी भारत–नेपाल संबंधों में खुली सीमा और नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही को दोनों देशों के मजबूत और गहरे रिश्तों का प्रतिबिंब बताया है।

अधिकारियों ने बताया—वार्ता सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण

बैठक के बाद दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों ने वार्ता को सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक बताते हुए कहा कि इस तरह के समन्वय से आने वाले समय में सीमा पार अवैध गतिविधियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा।

यह संदेश अपने आप में महत्वपूर्ण है। सीमा सुरक्षा तब अधिक प्रभावी होती है जब दोनों ओर की संस्थाएं एक-दूसरे को केवल पड़ोसी देश की एजेंसी के रूप में नहीं, बल्कि साझी चुनौती से निपटने वाले सहयोगी तंत्र के रूप में देखें।

वरिष्ठ प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में नेपाल के पर्सा एवं बारा जिलों के मुख्य जिला अधिकारियों सहित नेपाली प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया।

भारतीय पक्ष से पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक, पश्चिमी चंपारण के जिलाधिकारी, बगहा के पुलिस अधीक्षक, पूर्वी चंपारण के अपर समाहर्ता एवं उप विकास आयुक्त, मोतिहारी सदर अनुमंडल पदाधिकारी, रक्सौल अनुमंडल पदाधिकारी, रक्सौल भूमि सुधार उप समाहर्ता, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, वन प्रमंडल पदाधिकारी, उत्पाद अधीक्षक, सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट सहित विभिन्न विभागों और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रक्सौल से निकला संदेश—सुरक्षित सीमा, मजबूत मित्रता

भारत और नेपाल के बीच सुरक्षा सहयोग को केवल अपराध रोकने की व्यवस्था के रूप में देखना अधूरा होगा। सुरक्षित सीमा व्यापार को भरोसा देती है, नागरिकों को सुरक्षा देती है, पर्यटन और आवागमन को सहज बनाती है तथा दोनों देशों के बीच संबंधों में विश्वास बढ़ाती है।

रक्सौल आईसीपी की इस बैठक से यही संदेश सामने आया कि भारत और नेपाल अपनी खुली सीमा की ऐतिहासिक आत्मा को सुरक्षित रखते हुए उसके दुरुपयोग के खिलाफ साथ खड़े हैं।

सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के हित भी इसी में हैं—अपराध के लिए सख्ती, लेकिन रिश्तों के लिए सहजता; तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई, लेकिन सदियों पुराने सामाजिक संबंधों के लिए खुला संवाद।

यही संतुलन भारत–नेपाल संबंधों की सबसे बड़ी शक्ति है। जब रक्सौल और वीरगंज, मोतिहारी और पर्सा के अधिकारी एक मेज पर बैठकर साझा समस्याओं का समाधान तलाशते हैं, तो वह केवल सीमा प्रबंधन की बैठक नहीं होती—वह दो पड़ोसी देशों के बीच विश्वास को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की प्रक्रिया होती है।

By Ashok Mishra

Ashok Mishra is the Editor-in-Chief of Chanakya News India, a Hindi digital news platform established in 2012. The organization focuses on delivering verified breaking news, live news coverage, crime, entertainment, business, technology, and regional updates across India. Address: FNG vihar 2 sector 121 Gautam budhnagar Uttar pradesh, India Email -mpcgchanakyanewsindia@gmail.com Phone– +91 9315744968