विपक्षी परिवार को फंसाने की कथित साजिश नाकाम; पहाड़पुर से युवक बरामद, मां-बेटे गिरफ्तार
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | विशेष रिपोर्ट
श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर
मोतिहारी। पूर्वी चंपारण में पुलिस की बदली कार्यशैली का एक और उदाहरण हरसिद्धि थाना क्षेत्र में सामने आया है। युवक के कथित अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और तकनीकी अनुसंधान के सहारे कुछ ही समय में मामले की परतें खोल दीं। जिस युवक के अपहरण का आरोप विपक्षी परिवार पर लगाया गया था, उसे पुलिस ने पहाड़पुर थाना क्षेत्र में उसके एक परिचित के घर से सकुशल बरामद कर लिया।
पुलिस जांच में कथित अपहरण की कहानी सही नहीं पाई गई। पुलिस के अनुसार, पुराने विवाद में गिरफ्तारी से बचने और विपक्षी परिवार पर दबाव बनाने के उद्…
युवक और उसकी मां ने अपहरण की कहानी रची थी। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सूचना मिलते ही हरकत में आई पुलिस
हरसिद्धि थानाध्यक्ष सुनील कुमार के अनुसार, 21 सितंबर की रात पैठान पट्टी निवासी संजू देवी ने डायल-112 पर सूचना दी कि उनके 19 वर्षीय बेटे दिलखुश कुमार का ओलहा पेट्रोल पंप के समीप से बाइक सहित अपहरण कर लिया गया है।
आरोप गांव के ही भूलेन साह के परिवार पर लगाया गया था। मामला अपहरण जैसे गंभीर अपराध से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने बिना समय गंवाए जांच शुरू कर दी। युवक के मोबाइल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू किया गया तथा संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई गई।
मोबाइल लोकेशन ने पुलिस को पहुंचाया पहाड़पुर
तकनीकी अनुसंधान के दौरान दिलखुश की गतिविधियां पहाड़पुर थाना क्षेत्र में मिलने की जानकारी सामने आई। पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर 22 सितंबर को संबंधित स्थान पर छापेमारी की और युवक को उसके एक परिचित के घर से सकुशल बरामद कर लिया।
युवक की बरामदगी के बाद कथित अपहरण की पूरी कहानी संदेह के घेरे में आ गई। पुलिस ने इसके बाद पुराने विवाद और दोनों पक्षों के बीच हुई घटनाओं की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
पुराने विवाद से जुड़ी मिली कहानी
जांच में पुलिस को जानकारी मिली कि 19 सितंबर को दिलखुश कुमार और उसकी मां संजू देवी का भूलेन साह के परिवार से विवाद हुआ था। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान भूलेन साह की पत्नी पन्ना देवी के साथ मारपीट की घटना हुई थी और उन्हें सिर में चोट लगी थी।
पुलिस का कहना है कि इस मामले में संभावित कार्रवाई और गिरफ्तारी की आशंका के बीच कथित अपहरण की कहानी तैयार किए जाने की बात जांच में सामने आई।
पुलिस का दावा—दूसरे पक्ष को फंसाने की थी कोशिश
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों से संकेत मिला कि युवक ने अपनी मां के साथ मिलकर गिरफ्तारी से बचने और विपक्षी परिवार को आपराधिक मामले में फंसाने के उद्देश्य से अपहरण की कहानी बनाई थी।
इसके बाद पन्ना देवी के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई और दिलखुश कुमार तथा उसकी मां संजू देवी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में बदलती पुलिसिंग की तस्वीर
पूर्वी चंपारण में पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में हाल के समय में पुलिसिंग का फोकस केवल घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज करने तक सीमित नहीं दिख रहा है। अपराधियों की त्वरित गिरफ्तारी, तकनीकी अनुसंधान, फरार आरोपियों की तलाश और नशे के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है।
जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में शराब, मादक पदार्थ और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के साथ अपराध के गंभीर मामलों में भी पुलिस टीमों को तेजी से अनुसंधान और गिरफ्तारी के निर्देश दिए जा रहे हैं।
हरसिद्धि का यह मामला भी इसी कार्यशैली की एक तस्वीर पेश करता है। अपहरण की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने केवल शिकायत के आधार पर किसी परिवार के खिलाफ जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय तकनीकी साक्ष्यों की जांच की। मोबाइल लोकेशन और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए युवक तक पहुंची और पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाई।
इस कार्रवाई ने एक ओर कथित झूठे अपहरण की कहानी का पर्दाफाश किया, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाया कि तकनीकी अनुसंधान और तथ्य आधारित पुलिसिंग निर्दोष लोगों को गलत मुकदमे में फंसने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पूर्वी चंपारण पुलिस की मौजूदा रणनीति में अपराधियों पर दबाव, नशे के कारोबार पर प्रहार और मामलों के त्वरित निष्पादन को प्रमुखता मिलने से जिले में पुलिस की सक्रियता लगातार दिखाई दे रही है।
