SC/ST एक्ट के प्रावधानों के दुरुपयोग पर चर्चा, पूर्व CJI बी.आर. गवई ने कहा—सुधार का अधिकार संसद के पास
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026।
SC/ST (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति) अत्याचार निवारण अधिनियम के कथित दुरुपयोग को लेकर पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई के हालिया बयान के बाद कानून के प्रभावी इस्तेमाल और संभावित सुधारों पर चर्चा तेज हुई है।
जस्टिस गवई ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को भेदभाव और अत्याचार से संरक्षण देना है। हालांकि, उनके अनुसार किसी भी कानून के कुछ मामलों में दुरुपयोग की संभावना हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल दुरुपयोग के आधार पर कानून को समाप्त नहीं किया जा सकता।
कानून में बदलाव का अधिकार संसद को
जस्टिस गवई के अनुसार कानून में संशोधन करना संसद और विधायिका का क्षेत्र है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि गलत शिकायतों या कानून के दुरुपयोग की समस्या सामने आती है तो संसद संशोधन के माध्यम से ऐसे मामलों में कठोर दंडात्मक प्रावधान पर विचार कर सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका कानून बनाने का काम नहीं करती। न्यायालय संविधान की कसौटी पर कानून की वैधता की समीक्षा कर सकता है, जबकि कानून बनाना या उसमें संशोधन करना विधायिका का अधिकार है।
जस्टिस गवई ने दुरुपयोग को बताया दुर्लभ
महत्वपूर्ण रूप से, जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि SC/ST एक्ट के दुरुपयोग के मामले बहुत दुर्लभ हैं और इन्हें पूरे कानून को खत्म करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने इस मुद्दे को विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच टकराव में बदलने से बचने और देश की एकता बनाए रखने पर जोर दिया।
कानून के उद्देश्य और सुरक्षा के बीच संतुलन पर जोर
SC/ST एक्ट का मूल उद्देश्य जाति आधारित अत्याचार और भेदभाव से पीड़ित वर्गों को कानूनी संरक्षण देना है। वहीं, चर्चा का दूसरा पक्ष यह है कि यदि किसी मामले में कानून का गलत इस्तेमाल होता है तो निर्दोष व्यक्ति को कानूनी संरक्षण और प्रभावी जांच की व्यवस्था भी सुनिश्चित हो।
इसलिए मौजूदा बहस का केंद्र कानून को कमजोर करना नहीं, बल्कि पीड़ितों की सुरक्षा के साथ-साथ गलत शिकायतों के मामलों में उचित कानूनी प्रक्रिया और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | हिमांशु शुक्ला | बलौदा बाजार-भाटापारा
स्रोत: जस्टिस बी.आर. गवई के 23–24 सितंबर 2026 को प्रकाशित साक्षात्कार पर आधारित रिपोर्टें।
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