आस्था का महा-पर्व: 10 दलों में 500 श्रद्धालु करेंगे पवित्र मानसरोवर के दर्शन; टनकपुर से नावीढांग तक सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम! 👇
पिथौरागढ़/टनकपुर: शिवभक्तों के लिए बेहद सुखद समाचार है। विश्व प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए उत्तराखंड के रास्ते होने वाली यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) ने यात्रियों की सुविधा के लिए रूट पर सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर ली हैं।
📋 यात्रा के मुख्य आकर्षण और विवरण:
आगमन: श्रद्धालुओं का पहला दल दिल्ली से रवाना होकर 4 जुलाई को टनकपुर पहुंचेगा।
दलों की संख्या: इस वर्ष कुल 10 दल यात्रा पर जाएंगे, जिसमें प्रत्येक दल में 50 श्रद्धालु शामिल होंगे (कुल 500 तीर्थयात्री)।
KMVN की भूमिका: टनकपुर से लेकर नावीढांग तक यात्रियों के रहने, खाने और लॉजिस्टिक्स की पूरी जिम्मेदारी KMVN की है।
सुरक्षा व स्वास्थ्य: उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण इस बार हेल्थ चेकअप और सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा (Strict) किया गया है।
🏛️ यात्रा के बारे में 4 महत्वपूर्ण बिंदु:
संचालन: यह प्रतिष्ठित यात्रा भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा संचालित की जाती है।
समयावधि: दिल्ली से यात्रा शुरू होने और वापस लौटने तक कुल 18 से 22 दिन का समय लगता है।
मार्ग: यह यात्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ बॉर्डर से होते हुए तिब्बत (चीन) क्षेत्र में प्रवेश करती है।
ऐतिहासिक रूट: उत्तराखंड का यह रूट ऐतिहासिक और पौराणिक रूप से सबसे पुराना और दुर्गम सुंदर वादियों से घिरा हुआ माना जाता है।
“हमने टनकपुर से नावीढांग तक यात्रियों की सुरक्षा, आवास और भोजन की सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली हैं। टीमें लगातार रूट का जायजा ले रही हैं ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा निर्बाध और सुरक्षित रहे।” — मनीष कुमार, महाप्रबंधक, KMVN।
कैलाश मानसरोवर यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए साहस और प्रकृति के बीच का एक अद्भुत अनुभव भी है। KMVN की मुस्तैदी और प्रशासन के सहयोग से इस बार की यात्रा को और भी सुरक्षित बनाने का प्रयास किया गया है।
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