मिनी गन फैक्ट्री के बाद अवैध कारतूस निर्माण इकाई का भंडाफोड़, संगठित हथियार तस्करी नेटवर्क पर पूर्वी चंपारण पुलिस का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार
मोतिहारी। पूर्वी चंपारण पुलिस ने अपराध और अवैध हथियार तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में जिले में संचालित एक अवैध बुलेट (कारतूस) फैक्ट्री का सफल उद्भेदन किया गया है। इस कार्रवाई को जिले में हथियार तस्करों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
पुलिस द्वारा की गई संयुक्त छापेमारी में 500 से अधिक निर्मित एवं अर्धनिर्मित कारतूस, कारतूस बनाने की मशीनें, मेटल शीट, गन पाउडर, नाइट्रिक एसिड, रेड फास्फोरस, एसीटोन, चारकोल सहित बड़ी मात्रा में कारतूस निर्माण में प्रयुक्त अन्य सामग्री बरामद की गई। मौके से चार अपराधियों को हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा कारतूस खरीदकर विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई करने वाले नेटवर्क से जुड़े लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
यह विशेष अभियान मेहसी, चकिया, मधुबन, गड़हिया और फेनहारा थाना क्षेत्रों में चलाया गया। एसडीपीओ चकिया एवं एसडीपीओ पकड़ीदयाल के नेतृत्व में पांच थानों की पुलिस, जिला आसूचना इकाई (DIU) और तकनीकी टीम ने समन्वित कार्रवाई करते हुए इस अवैध कारखाने का भंडाफोड़ किया।
इस पूरे ऑपरेशन में मेहसी थानाध्यक्ष सानु गौरव तथा तकनीकी शाखा के कृष्ण मोहन की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही, जिनकी सतर्कता और तकनीकी समन्वय के कारण यह बड़ी सफलता पुलिस को मिली।
गौरतलब है कि पूर्वी चंपारण में पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में अपराधियों, हथियार तस्करों, शराब माफियाओं और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है। हाल के दिनों में अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़, कई कुख्यात अपराधियों की गिरफ्तारी और अब अवैध कारतूस फैक्ट्री का उद्भेदन इस बात का संकेत है कि जिला पुलिस केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध की पूरी सप्लाई चेन और नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति पर काम कर रही है। यही कारण है कि पूर्वी चंपारण पुलिस की कार्रवाई आज पूरे बिहार में चर्चा का विषय बनी हुई है।
पुलिस मुख्यालय ने इस सफल अभियान में शामिल पूरी टीम को ₹25,000 की पुरस्कार राशि से सम्मानित करने की घोषणा की है। मामले की विस्तृत जानकारी एसडीपीओ चकिया द्वारा प्रेस वार्ता में साझा की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी तथा इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है।
यदि इसी प्रकार अपराध के स्रोत पर लगातार प्रहार जारी रहा, तो पूर्वी चंपारण में संगठित अपराध और अवैध हथियार तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होने की उम्मीद और मजबूत होगी।
