*अरावली की पहाड़ियों के मध्य बसा देवमाली गांव जहां घरों पर ताला नहीं, पूरी जमीन भगवान के नाम’*
शम्भू दयाल व्यास, ब्यावर
*’देवमाली : जहां मिट्टी में बसती है संस्कृति और परंपराओं में धड़कता है भारत’*
ब्यावर। भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है। यह कथन केवल एक भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का शाश्वत सत्य है। राजस्थान की वीर भूमि अपनी ऐतिहासिक धरोहरों, भव्य दुर्गों और रंग-बिरंगी लोक संस्कृति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, किन्तु इस प्रदेश की वास्तविक पहचान उसके उन गाँवों में छिपी है जहां आज भी परंपराएं जीवन का हिस्सा हैं, आस्था व्यवहार में दिखाई देती है और संस्कृति सांस लेती हुई महसूस होती है। ब्यावर जिले की मसूदा तहसील में अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा देवमाली ऐसा ही एक अद्वितीय गांव है, जिसने अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर पूरे देश के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया है।
देवमाली की ओर बढ़ते ही वातावरण बदलने लगता है। पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव की पहली झलक ही मन को मोह लेती है। कच्चे छपरेलध्कच्ची छत वाले घर, स्वच्छ गलियां, मिट्टी की सौंधी महक, लोकगीतों की मधुर गूंज और ग्रामीण जीवन की सहजता किसी भी आगंतुक को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। यहां आधुनिकता दिखाई देती है, लेकिन उसने परंपराओं को विस्थापित नहीं किया है। यही देवमाली की सबसे बड़ी विशेषता है।
*आस्था और लोक विश्वास का पावन धाम*
देवमाली लोकदेवता भगवान श्री देवनारायण की दिव्य लीलाओं और लोक आस्था से जुड़ा अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। गुर्जर समाज सहित अन्य सभी जाति धर्मो के लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान अटूट विश्वास का केंद्र है। जनश्रुति है कि भगवान देवनारायण के पहली बार देवमाली आगमन पर उनके सम्मान में मंदिर के आसपास की चट्टानें झुक गयी थी। वर्तमान में इन झुकी हुई चट्टानों को श्रद्धालु आस्था का प्रतीक मानते हैं।
गांव का प्रत्येक शुभ कार्य भगवान देवनारायण के नाम से प्रारंभ होता है। यहां धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की शैली है। श्रद्धालु दूर-दूर से अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और लोक विश्वास के अनुसार अनेक लोगों को यहां आध्यात्मिक शांति तथा मानसिक संबल प्राप्त होता है।
*विश्वास की अनूठी परंपरा*
देवमाली की सबसे अनूठी पहचान उसका सामाजिक विश्वास है। गांव के अधिकांश घरों में आज भी दरवाजों पर ताले नहीं लगाए जाते। यह परंपरा केवल एक रीति नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज की ईमानदारी, पारस्परिक विश्वास और सामूहिक जीवन-मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। यहाँ के सभी मकान पारंपरिक कच्ची छपरेलध्कच्ची छत वाली शैली में बने हुए हैं। आधुनिक निर्माण सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद गांव ने अपनी स्थापत्य विरासत को सुरक्षित रखा है। यह दृश्य आज के समय में अत्यंत दुर्लभ है और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
देवमाली की एक और विलक्षण विशेषता यह है कि गांव की संपूर्ण भूमि आज भी राजस्व अभिलेखों में भगवान श्री देवनारायण के नाम दर्ज है। यह व्यवस्था भारतीय लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय उदाहरण है।
*ग्रामीण पर्यटन का राष्ट्रीय मॉडल*
आज जब ग्रामीण पर्यटन को आत्मनिर्भर भारत और स्थानीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है, तब देवमाली ने इस दिशा में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। भारत सरकार ने वर्ष 2024 में देवमाली को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव (Best Tourist Village) का सम्मान प्रदान कर इसकी सांस्कृतिक और पर्यटन महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया।
देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां केवल प्राकृतिक सौंदर्य देखने नहीं आते, बल्कि भारतीय ग्राम्य जीवन की वास्तविक अनुभूति प्राप्त करने आते हैं। यहां की संस्कृति, लोक परंपराएँ, धार्मिक आस्था, ग्रामीण स्थापत्य और प्राकृतिक परिवेश मिलकर एक ऐसा अनुभव प्रदान करते हैं, जो आधुनिक पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग है।
*प्रकृति और संस्कृति का संतुलित संगम*
अरावली पर्वतमाला की गोद में बसे इस गांव का प्राकृतिक सौंदर्य इसकी सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक प्रभावशाली बना देता है। हरियाली, शांत वातावरण और पारंपरिक जीवनशैली यह संदेश देते हैं कि प्रकृति और संस्कृति एक-दूसरे की पूरक हैं। देवमाली ने विकास और विरासत के बीच ऐसा संतुलन स्थापित किया है जो आज के समय में अनुकरणीय है।
’नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा’
तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में जहां अनेक गांव अपनी सांस्कृतिक पहचान खोते जा रहे हैं, वहीं देवमाली अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। यह गांव बताता है कि आधुनिक सुविधाएं अपनाना आवश्यक है, किन्तु अपनी संस्कृति, लोक-परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को त्यागना विकास नहीं है।
देवमाली की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने अपनी परंपराओं को संग्रहालय की वस्तु नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें आज भी जनजीवन का अभिन्न हिस्सा बनाए रखा है। यही कारण है कि यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति भारतीय संस्कृति की वास्तविक आत्मा का साक्षात्कार करता है।
*भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक*
देवमाली केवल एक गांव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोक-विश्वास और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। यह गांव हमें याद दिलाता है कि भारत की पहचान उसकी तकनीकी प्रगति जितनी ही उसकी सांस्कृतिक जड़ों से भी है।
जब कोई यात्री देवमाली की धरती पर कदम रखता है तो उसे केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की जीवित संस्कृति, लोक-आस्था, विश्वास, सादगी और मानवीय मूल्यों का साक्षात्कार होता है। इन्हीं विशेषताओं से देवमाली आज राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए ग्रामीण पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रेरणास्रोत बन चुका है।
देवमाली की मिट्टी सचमुच केवल मिट्टी नहीं है, वह भारतीय संस्कृति की सुगंध है, लोक-आस्था का आधार है और उस भारत की पहचान है, जिसकी जड़ें आज भी उसके गांवों में सुरक्षित हैं।
किरोड़ी लाल मीना
वरिष्ठ सहायक,
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान
