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यूपी में दहेज उत्पीड़न की सीधे FIR नहीं होगी

ByNews Editor

Mar 29, 2026

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद डीजीपी का आदेश, 31 मामलों में रिपोर्ट दर्ज करने पर रोक

यूपी में अब दहेज उत्पीड़न और चेक बाउंस समेत 31 मामलों में पुलिस सीधे रिपोर्ट दर्ज नहीं करेगी। इसके लिए पहले मजिस्ट्रेट के यहां मुकदमा दायर करना होगा। एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद डीजीपी राजीव कृष्ण ने यह आदेश जारी किया है। डीजीपी ने प्रदेश के सभी पुलिस अफसरों को इसका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

DGP Order: FIR Not Mandatory for Dowry, 31 Cases | India News

डीजीपी ने कहा है कि जिन अपराधों में कानून सिर्फ परिवाद (कोर्ट में सीधी शिकायत) का नियम है, वहां FIR दर्ज करना पूरी तरह गलत और अवैध है। अब थाना प्रभारी और विवेचक (जांच अधिकारी) को FIR दर्ज करने से पहले यह जरूर जांचना होगा कि संबंधित केस में पुलिस रिपोर्ट पर कोर्ट संज्ञान ले सकती है या नहीं।

यूपी में अब दहेज उत्पीड़न और चेक बाउंस समेत 31 मामलों में पुलिस सीधे रिपोर्ट दर्ज नहीं करेगी। इसके लिए पहले मजिस्ट्रेट के यहां मुकदमा दायर करना होगा। एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद डीजीपी राजीव कृष्ण ने यह आदेश जारी किया है। डीजीपी ने प्रदेश के सभी पुलिस अफसरों को इसका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

डीजीपी ने कहा है कि जिन अपराधों में कानून सिर्फ परिवाद (कोर्ट में सीधी शिकायत) का नियम है, वहां FIR दर्ज करना पूरी तरह गलत और अवैध है। अब थाना प्रभारी और विवेचक (जांच अधिकारी) को FIR दर्ज करने से पहले यह जरूर जांचना होगा कि संबंधित केस में पुलिस रिपोर्ट पर कोर्ट संज्ञान ले सकती है या नहीं।

डीजीपी की ओर से जारी सर्कुलर में अभियोजन विभाग की ओर से भेजे गए उन मामलों की सूची भी जोड़ी गई है, जिसमें सीधे FIR दर्ज नहीं की जा सकती है। इनमें महिलाओं से घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, चेक बाउंस, भ्रूण हत्या, जानवरों से अत्याचार, पर्यावरण और प्रदूषण से जुड़े मामले शामिल हैं।

इनके अलावा उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी और खाने में मिलावट के मामलों में उपभोक्ता फोरम या FSSAI के पास जाना होगा। इसकी FIR पुलिस दर्ज नहीं करेगी। बाल श्रम, वायु प्रदूषण, विदेश से माल लाने-भेजने, ट्रेड मार्क, मानव अंग तस्करी, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न, जल प्रदूषण, केबल टेलीविजन नेटवर्क, विदेशी मुद्रा प्रबंधन, कीटनाशक दवाओं को नियंत्रित करने के मामले में भी सीधे FIR नहीं होगी। इसके लिए संबंधित विभाग में पहले शिकायत दर्ज करानी होगी।