पूर्व आर्मी चीफ चीफ जनरल एमएम नरवणे ने गुरुवार को कहा कि 2020 में चीन के साथ गतिरोध में सरकार ने सेना को अकेला नहीं छोड़ा था। सरकार पूरी तरह से सपोर्ट में थी और पूरा अधिकार दिया था कि हालात बिगड़ने पर चीनी सैनिकों पर गोलियां चला सकें।
जनरल नरवणे ने गुरुवार को कुछ चैनल्स को दिए इंटरव्यू में अपनी किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ से जुड़े विवादों पर बात की।
इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, ‘जो उचित समझो वह करो’ टिप्पणी सशस्त्र बलों पर सरकार के पूरे भरोसे को दर्शाती है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। जमीनी स्थिति का जवाब देने के लिए सशस्त्र बलों को फ्री हैंड दिया गया था।
दरअसल, राहुल गांधी ने 2 और 3 फरवरी को संसद में नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ का हवाला देकर चीन घुसपैठ और अग्निवीर योजना के रीव्यू का मुद्दा उठाया था। इसके बाद उन्होंने दावा किया था कि सरकार ने सेना को अकेला छोड़ दिया था। इसके बाद वे किताब लेकर भी संसद पहुंचे थे।
नरवणे बोले- अगर सरकार को कुछ सही नहीं लगा तो ठीक है
- जब उनकी पुरानी किताब को अभी तक रक्षा मंत्रालय से क्लियरेंस न मिलने को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मेरी किताब में कुछ बहुत संवेदनशील था, लेकिन अगर सरकार को लगा कि कुछ बातें सही नहीं बैठ रही हैं, तो ठीक है।’
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- आगे भारत-चीन सीमा विवाद पर उन्होंने कहा कि रेचिन ला में सेनाएं आमने-सामने थीं, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि हमने स्थिति को और बिगड़ने नहीं दिया और अपने लक्ष्यों को हासिल किया।
- पूर्व सेना प्रमुख ने सरकार की अग्निपथ योजना पर बताया, ‘जब भी कोई नई पॉलिसी आती है, तो उस पर चर्चा होती है। मैंने चर्चा के दौरान अपनी साफ और बेबाक राय रखी थी। एक बार जब फैसला ले लिया जाता है, तो उसे लागू करना हमारा काम है।’
जनरल एमएम नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि उनकी आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में उनके सैन्य करियर के साथ-साथ 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद, अग्निपथ योजना का जिक्र था। इसक साथ की उन्होंने सेना प्रमुख रहते हुए उनके रणनीतिक निर्णयों के बारे में भी गया है।
31 अगस्त 2020 को पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर कैलाश रेंज में हुए भारतीय सेना को चीनी उकसावे का जवाब कैसे देना चाहिए, सरकार ने इस पर तुरंत कोई पॉलिटिकल निर्देश नहीं दिया था। यही विवाद की वजह है।
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https://youtu.be/bYOoJ6VUy04राहुल ने संसद में क्या आरोप लगाए
- 2 और 3 फरवरी: लोकसभा में राहुल ने एक मैगजीन में छपे आर्टिकल को पढ़ने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया था कि इसमें नरवणे की बुक के अंश हैं। स्पीकर ओम बिरला ने इसकी इजाजत नहीं दी। इसके बाद लोकसभा में हंगामा हो गया था, जिससे कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। वहीं, हंगामा करने वाले आठ सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था। तब से किताब चर्चा में है।
- 4 फरवरी: राहुल किताब की कॉपी लेकर संसद पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगर आज पीएम आए तो उन्हें यह किताब दूंगा। राहुल ने किताब का वह पेज खोलकर दिखाया, जिसमें लिखा है कि प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ से कहा था- जो उचित समझो वह करो!। राहुल ने कहा कि सरकार और रक्षा मंत्री कह रहे है कि किताब का अस्तित्व नहीं है। देखिए यह रही किताब। नरवणे की इस अनपब्लिश बुक में चीन के साथ भारतीय सेना की 2020 की झड़पों के साथ-साथ अग्निवीर योजना का रीव्यू किया गया है।
- 9 फरवरी: पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश्ड किताब पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा था कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई। इसका कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया गया। कंपनी ने कहा कि पब्लिशिंग के सभी राइट्स हमारे पास हैं। अब तक किताब की न तो कोई छपी हुई कॉपी और न ही डिजिटल कॉपी सामने आई।
- 10 फरवरी: इसके जवाब में राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा- या तो नरवणे झूठ बोल रहे हैं या पेंगुइन कंपनी। वहीं कंपनी के बयान को पूर्व आर्मी चीफ ने X पर रीपोस्ट किया। उन्होंने लिखा- यह है बुक पर स्थिति।कांग्रेस ने एक मैगजीन में पब्लिश आर्टिकल के पेज सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किए। इसमें पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश बुक Four Stars of Destiny के अंश हैं। इसमें 31 अगस्त 2020 को लद्दाख सीमा पर भारत-चीन के बीच बने हालात का जिक्र है। बताया जब चीनी टैंक पूर्वी लद्दाख में बढ़ रहे थे तब क्या हुआ?

नरवणे बोले- चीन गतिरोध में सरकार ने अकेला नहीं छोड़ा:राहुल का दावा था- पीएम पूर्व आर्मी चीफ से बोले थे जो उचित समझो, करो

