श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर
रक्सौल, 16 सितंबर। नेपाल के पृथ्वी राजमार्ग पर बाढ़ से क्षतिग्रस्त कृष्णभीर खंड में पहाड़ी काटकर नया वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया है। नेपाल के सड़क विभाग ने 17 सितंबर से इस खंड पर दोनों दिशाओं में यातायात बहाल करने की सूचना जारी की है। मार्ग पर नियमित आवाजाही शुरू होने से यात्रियों के साथ आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करने वाले मालवाहक वाहनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
धादिंग जिले में स्थित कृष्णभीर खंड काठमांडू की आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 26 अगस्त की बाढ़ में सड़क को सहारा देने वाली सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद 30 अगस्त की बाढ़ में दीवार ढहने से इस हिस्से पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इससे राजधानी तक जरूरी सामान पहुंचाने में कठिनाई बढ़ गई।
क्षतिग्रस्त हिस्से का सड़क विभाग और नेपाल जियोटेक्निकल सोसाइटी के विशेषज्ञों ने अध्ययन किया। चार दिन के तकनीकी आकलन के बाद पहाड़ी की ओर नया रास्ता बनाने का निर्णय लिया गया। चार सितंबर से पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य शुरू हुआ।
निर्माण संबंधी रिपोर्ट के मुताबिक, पहाड़ी में करीब 35 मीटर ऊंचाई तक और लगभग 20 मीटर अंदर की ओर कटान किया गया। तकनीकी कर्मचारियों सहित करीब 50 लोगों की टीम ने प्रतिदिन 12 से 16 घंटे तक काम किया। सड़क को वाहनों के चलने योग्य बनाने के लिए गिट्टी बिछाने, जलनिकासी की व्यवस्था और ढलान सुधारने का काम भी किया गया।
नए रास्ते से गैस टैंकर सहित कुछ वाहनों को परीक्षण के तौर पर गुजारा गया है। नियमित यातायात बहाल करने की तैयारी निर्माण की स्थिति और मौसम को ध्यान में रखकर की जा रही है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, दोबारा भूस्खलन होने पर संचालन प्रभावित हो सकता है।
कृष्णभीर में सड़क बाधित होने का असर काठमांडू में रसोई गैस की आपूर्ति पर भी पड़ा। गैस टैंकर राजधानी तक नहीं पहुंच पाने के कारण कंपनियों ने बीरगंज, चितवन और हेटौडा सहित अन्य स्थानों के संयंत्रों में सिलेंडर भरकर वैकल्पिक रास्तों से भेजे। इस मार्ग पर आवाजाही सामान्य होने से आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ा दबाव कम होने की उम्मीद है।
मार्ग के संचालन के साथ इसकी दीर्घकालिक सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। स्थल का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों ने पहाड़ी की ढलान मजबूत करने और सुरंग अथवा पुल जैसे स्थायी विकल्पों का अध्ययन करने पर जोर दिया है। बारिश और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए नए रास्ते की नियमित तकनीकी निगरानी आवश्यक रहेगी।
