लुधियाना, 21 अक्टूबर () पंजाब भर के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संयुक्त मंच ने अपनी मांगें मनवाने के लिए 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी लेकर एक कड़ा संघर्ष शुरू किया है। आज, राज्य भर में लाखों कर्मचारियों ने सामूहिक छुट्टी ली है
और संघर्ष के मैदान में उतर आए हैं। लुधियाना में DC कार्यालय के बाहर ‘जॉइंट एक्शन कमेटी’ (संयुक्त कार्रवाई समिति) के बैनर तले इकट्ठा हुए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने कई घंटों तक धरना दिया। उन्होंने पंजाब सरकार की आलोचना की और अपनी मांगें मानने को कहा। धरने को संबोधित करते हुए विभिन्न यूनियनों के राज्य और जिला नेताओं – गुरप्रीत सिंह मेहदूद, संदीप भुम्बक, गुरदीप सिंह चीमा, गुरमेल सिंह मैरे, केवल सिंह बनवैत, धन्ना सिंह सवाधी, रमनजीत सिंह, बलविंदर सिंह लटाला, सुरिंदर सिंह बैंस, संजीव शर्मा, जगदेव सिंह लल्टोन, राजदीप सिंह, राज कुमार, कुलदीप सिंह, जसविंदर सिंह, हरदेव सिंह मुल्लांपुर, परमिंदर मलोद, खुशवंत सिंह बाजवा, परमजीत सिंह मान, तेहिल सिंह सराभा और गुरदयाल सिंह तलवंडी ने कहा कि अगर सरकार 17 जुलाई 2020 के पत्र को रद्द नहीं करती है, तो 2020 के बाद भर्ती हुए सभी कर्मचारियों और ‘अनुकंपा के आधार’ (compassionate basis) पर भर्ती हुए लोगों को पूरा वेतन नहीं मिलेगा। साथ ही, अगर 15 जनवरी 2015 के पत्र को रद्द नहीं किया जाता है, तो प्रोबेशन (परिवीक्षा) अवधि के दौरान भी पूरा वेतन नहीं दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पुरानी पेंशन योजना को बहाल नहीं किया गया और लंबित काम तुरंत पूरे नहीं किए गए, तो वे सरकार को ईंट-से-ईंट बजाकर (पूरी तरह से) नष्ट कर देंगे। नेताओं ने कहा कि इन मांगों के अलावा, कै�
