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* वृक्षारोपण समिति, पर्यावरण समिति एवं जिला गंगा समिति की बैठक में पर्यावरण संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और गंगा-आर्द्रभूमि संरक्षण की हुई समीक्षा*

BySantosh Kumar Pandey

Aug 11, 2026

स्थान-सुलतानपुर उत्तर प्रदेश, रिपोर्ट-संतोष कुमार पाण्डेय, विशेष सम्वाददाता चाणक्य न्यूज इंडिया जिला अधिकरी महोदय इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता व मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट नवीन सभागार में वृक्षारोपण समिति एवं पर्यावरण समिति/जिला गंगा समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी वन प्रभाग, उपायुक्त उद्योग, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीसी एनआरएलएम, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका, जिला विकास अधिकारी, डीसी मनरेगा सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जिलाधिकारी महोदय द्वारा जनपद में किए गए वृक्षारोपण, पौधों के अनुरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गयी। उन्होंने कहा कि केवल पौधरोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का समुचित संरक्षण, सिंचाई एवं नियमित निगरानी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
जिलाधिकारी महोदय ने कटहल के वृक्षों के अधिक से अधिक रोपण तथा कटहल से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि कटहल की न्यूट्रिशनल वैल्यू को बनाए रखते हुए उसके प्रसंस्करण एवं विभिन्न उत्पादों के निर्माण के माध्यम से इसे स्वरोजगार से जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों एवं कृषि उत्पादों को रोजगार और आय के साधन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं एवं युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें।
जिलाधिकारी महोदय ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि वृक्षारोपण दिवस एवं विश्व पर्यावरण दिवस सहित विभिन्न अवसरों पर लगाए गए पौधों का नियमित अनुरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी रोपित पौधों को आवश्यकतानुसार जल उपलब्ध कराने के साथ-साथ सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान किया जाए तथा उनकी नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पौधों की जियो-टैगिंग/स्थलीय स्थिति के अनुरूप उनकी देखरेख सुनिश्चित करते हुए यह भी देखा जाए कि लगाए गए पौधों का संरक्षण प्रभावी ढंग से हो रहा है।
जिलाधिकारी महोदय द्वारा आगामी 15 अगस्त को आयोजित होने वाले वंदे मातरम वाटिका कार्यक्रम की तैयारियों की भी समीक्षा की गयी। उन्होंने चिन्हित स्थान पर कार्यक्रम को वृहद एवं प्रभावी तरीके से आयोजित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के अंतर्गत 150 पौधों का पौधरोपण किया जाना प्रस्तावित है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कार्यक्रम की सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूर्ण करने तथा पौधरोपण के उपरांत उनके संरक्षण एवं अनुरक्षण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पर्यावरण समिति की बैठक के दौरान जिलाधिकारी महोदय द्वारा जनपद में वेस्ट मैनेजमेंट की स्थिति की समीक्षा की गयी। इस दौरान प्लास्टिक वेस्ट, बायोमेडिकल वेस्ट, सॉलिड वेस्ट एवं ई-वेस्ट के प्रबंधन की जानकारी ली गयी।
जिलाधिकारी महोदय ने संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की कि विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट का संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन एवं निस्तारण किस प्रकार किया जा रहा है। उन्होंने निर्देशित किया कि वेस्ट मैनेजमेंट की नियमित निगरानी की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि अपशिष्ट का निस्तारण निर्धारित मानकों एवं नियमानुसार ही किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जहां कहीं भी वेस्ट मैनेजमेंट में कमी पायी जाए, वहां तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा संबंधित संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों को सही तरीके से अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जागरूक किया जाए।
जिलाधिकारी महोदय ने बल्क वेस्ट जनरेटर (बी0डब्लू0जी0) को चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवासीय परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों, मैरिज हॉल, हॉस्टल, हॉस्पिटल आदि बड़े स्तर पर अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले संस्थानों को चिन्हित किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन संस्थानों द्वारा उत्पन्न किए जा रहे वेस्ट का किस प्रकार प्रबंधन एवं निस्तारण किया जा रहा है, इसकी जानकारी प्राप्त की जाए। साथ ही संस्थानों के प्रबंधन को उचित वेस्ट मैनेजमेंट के संबंध में जागरूक करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
जिला गंगा समिति की बैठक के दौरान जिलाधिकारी महोदय द्वारा समिति द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गयी। उन्होंने गंगा एवं जल स्रोतों के संरक्षण के संबंध में आयोजित किए जाने वाले जागरूकता कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली तथा जनसामान्य को पर्यावरण एवं जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रभावी गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही आर्द्रभूमि संरक्षण की भी समीक्षा की गयी। जिलाधिकारी महोदय ने संबंधित अधिकारियों को आर्द्रभूमियों के संरक्षण, स्वच्छता एवं उनके पर्यावरणीय महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने तथा संबंधित कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है। वृक्षारोपण, पौधों का संरक्षण, अपशिष्ट का उचित प्रबंधन, जल स्रोतों एवं आर्द्रभूमियों का संरक्षण तथा जन-जागरूकता के माध्यम से ही पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावी रूप से बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए शासन की मंशा के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए।