बैलेट पेपर से चुनाव, कर्नाटक में कांग्रेस का सूपड़ा साफ!
EVM पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को झटका, चारों MLC सीटों पर NDA का कब्जा
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | हिमांशु शुक्ला | बलौदाबाजार-भाटापारा
कर्नाटक। चुनावी प्रक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को कर्नाटक विधान परिषद के चुनावों में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। 23 अक्टूबर को चार MLC सीटों के लिए हुए चुनाव में मतपत्रों (बैलेट पेपर) का इस्तेमाल किया गया। 28 अक्टूबर को सामने आए नतीजों में कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
इन चुनावों में भाजपा ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस ने एक सीट पर कब्जा जमाया। सबसे अहम नतीजा बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का रहा, जहां जेडीएस समर्थित उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा MLC पुट्टन्ना को 908 मतों से पराजित किया।
EVM पर सवाल और बैलेट पेपर का परिणाम बना राजनीतिक चर्चा का विषय
कांग्रेस और विपक्ष के कुछ नेताओं की ओर से EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने तथा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग के बीच आए इन नतीजों ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। भाजपा नेताओं ने इसे कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाने वाला परिणाम बताया है।
हालांकि, निष्पक्ष विश्लेषण के लिए यह भी समझना जरूरी है कि MLC चुनावों में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता भाग लेते हैं। इसलिए इन नतीजों को पूरे राज्य की जनता के जनादेश या आगामी विधानसभा चुनावों का सीधा परिणाम मानना उचित नहीं होगा।
जनता के भरोसे की कसौटी पर राजनीतिक दल
लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल की विश्वसनीयता केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसके काम, नीतियों और चुनावी प्रदर्शन से तय होती है। चुनाव हारने पर व्यवस्था पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को आत्ममंथन करना चाहिए और मतदाताओं के विश्वास को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए।
कर्नाटक के इन नतीजों ने कांग्रेस के सामने संगठन, रणनीति और मतदाताओं के भरोसे को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही यह संदेश भी दिया है कि लोकतंत्र में किसी दल की जीत या हार का फैसला मतदाता करते हैं।
रिपोर्ट: हिमांशु शुक्ला
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | बलौदाबाजार-भाटापारा
