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BANGKOK थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर पर दूसरे दिन भी गोलियां बरसी

ByNews Editor

Jul 25, 2025 #BANGKOK
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BANGKOK थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर पर दूसरे दिन भी गोलियां बरसी

BANGKOK 16 की मौत, 1 लाख लोग सीमा इलाकों से हटाए गए

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1000 हजार साल पुराने दो शिव मंदिरों को लेकर थाईलैंड और कंबोडिया के बीच शुरू हुआ संघर्ष दूसरे दिन भी जारी है।

शुक्रवार सुबह दोनों देशों के सैनिकों ने बॉर्डर पर फायरिंग की। थाई सरकार ने शुक्रवार को बताया कि 1 लाख से ज्यादा लोग घर छोड़ने के लिए मजबूर हो चुके हैं।

अब तक थाईलैंड के 15 लोगों की मौत हुई है। जिसमें 1 सैनिक और 14 आम लोग हैं। 46 लोग घायल हुए हैं।

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अभी तक कंबोडिया की तरफ से मृतकों या घायलों की कोई आधिकारिक संख्या नहीं बताई गई है। हालांकि कई मीडिया रिपोर्ट्स में 1 शख्स के मारे जाने का दावा किया जा रहा है।

थाई सेना के बीच बीते 2 महीने से विवाद जारी है। 28 मई को एमरॉल्ड ट्राइंगल पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई थी। यह वो जगह है थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की सीमाएं मिलती हैं। थाईलैंड और कंबोडिया दोनों ही इस इलाके पर दावा करते हैं।

गुरुवार सुबह यह और ज्यादा बढ़ गया था। कंबोडियाई सेना के मुताबिक थाई सैनिकों ने सीमा के पास ता मुएन थॉम मंदिर की ओर बढ़त बनाई और उसके चारों ओर कंटीली तार लगा दी। इसके बाद थाई सैनिकों ने ड्रोन छोड़ा और हवाई फायरिंग की।

वहीं, थाई सेना के मुताबिक पहले कंबोडियाई सैनिकों ने संघर्ष शुरू किया। थाईलैंड ने बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो गोलीबारी शुरू हो गई।

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दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ने के बाद 15 जून को थाईलैंड की PM पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने कंबोडिया के नेता हुन सेन से फोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत में उन्होंने थाई सेना के कमांडर की आलोचना की थी। इसे थाईलैंड में गंभीर मामला माना जाता है, क्योंकि सेना का वहां काफी प्रभाव है।

इस बातचीत के लीक होने के बाद देशभर में गुस्सा फैल गया था। इसके बाद कोर्ट ने PM को पद से हटा दिया। हालांकि, पाइतोंग्तार्न ने माफी मांगते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी सिर्फ विवाद सुलझाने के लिए थी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

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थाईलैंड और कंबोडिया का इतिहास लंबे समय तक खमेर साम्राज्य (कंबोडिया) और सियामी साम्राज्य (थाईलैंड) के बीच टकरावों से जुड़ा रहा है।

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फ्रांस और ब्रिटिश शासन के दौरान भी दोनों देशों की सीमाओं को तनाव था, जिसकी वजह से प्रीह विहियर (प्रिय विहार) और ता मुएन थॉम मंदिरों के आसपास की जमीन पर अधिकार को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद लगातार चलता रहा था।

1907 में जब कंबोडिया फ्रांस के अधीन था तब दोनों देशों के बीच 817 किमी की लंबी सीमा खींची गई थी। थाईलैंड ने इसका विरोध किया, क्योंकि नक्शे में प्रीह विहियर (प्रिय विहार) मंदिर कंबोडिया के हिस्से में दिखाया गया था। वहीं, ता मुएन थॉम मंदिर को थाईलैंड में दिखाया गया, जबकि कंबोडिया इसे अपना मानता है।