1. ट्रम्प बोले- ईरान शर्तें पूरी करे तभी राहत मिलेगी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि ईरान को प्रतिबंधों से राहत तभी मिलेगी, जब वह समझौते की सभी शर्तों का पालन करेगा। अमेरिका ने फिलहाल किसी भी तत्काल आर्थिक राहत से इनकार किया है।
2. इजराइल ने डील से किनारा किया: इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने कहा कि यह ट्रम्प की डील है और इजराइल इससे बंधा नहीं है। वहीं रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी साफ किया कि दक्षिणी लेबनान से सेना नहीं हटेगी।
3. मैक्रों ने यूरेनियम पर शर्त रखी: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को निष्क्रिय कर IAEA की निगरानी में रखा जाना चाहिए, ताकि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए न हो सके।
4. ईरान ने समझौते को अपनी जीत बताया: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को ‘जीत का दस्तावेज’ बताया। उन्होंने कहा कि इजराइल की नाराजगी ही साबित करती है कि बातचीत में ईरान मजबूत स्थिति में रहा।
5. दुनियाभर के देशों ने समझौते का स्वागत किया: UAE, कुवैत, स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान समेत कई देशों ने अमेरिका-ईरान समझौते को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
ईरान ने मंगलवार को 2026 की शुरुआत में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े दो लोगों को फांसी दे दी। ईरानी न्यायपालिका के मुताबिक जवाद जमानी और अबोलफजल सईदी को इस साल की अशांति का नेता माना गया था।
न्यायपालिका की समाचार एजेंसी मिजान के अनुसार दोनों को सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने, राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश रचने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत कई आरोपों में दोषी ठहराया गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनके लिए सबसे अहम बात यह है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न करे। उन्होंने कहा, “समझौते में साफ लिखा है कि ईरान न परमाणु हथियार बनाएगा, न खरीदेगा और न ही उसे हासिल करने की कोशिश करेगा। अगर ईरान ने परमाणु हथियार पाने की कोशिश की तो उसे बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”
ट्रम्प ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं है। उनके मुताबिक, मौजूदा ईरानी नेतृत्व व्यावहारिक, मजबूत और समझदार है और अपने देश के हित में काम करना चाहता है।
उन्होंने कहा, “मैं सत्ता परिवर्तन में विश्वास नहीं करता। मेरी प्राथमिकता सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार न हो।”
