➡️ खुशियों की दास्तां
➡️ ट्राईसाइकिल : उम्मीद की नई सवारी
➡️ सूरत सिंह दांगी के जीवन की मिली नई गति
मध्य प्रदेश के सागर जिले के जैसीनगर में बसा छोटा सा गांव खमकुवा। इस गांव के श्री सूरत सिंह दांगी लंबे समय से पैरों की कमजोरी से जूझ रहे थे। चलना-फिरना मुश्किल हो गया था। घर की चारदीवारी के बाहर की दुनिया उनके लिए दूर की कौड़ी बन गई थी। बाजार जाना, रिश्तेदारों से मिलना, एक स्थान से दूसरे स्थान जाना सब कुछ एक सपने जैसा लगता था। जीवन मानो थम सा गया था।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी एक दिन सूरत सिंह दांगी ने हिम्मत जुटाई और कलेक्टर श्री संदीप जी आर की जनसुनवाई में पहुंचे और अपनी फरियाद कलेक्टर को सुनाई। उन्होंने कहा – “साहब, मैं चल-फिर नहीं पाता। यदि बैटरी वाली ट्राईसाइकिल मिल जाए, तो मेरा जीवन फिर से चलने लगेगा।”
कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने बड़ी संवेदना और आत्मीयता से उनकी बात सुनी और बिना देरी किए सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए – “सूरत सिंह दांगी के आवेदन को प्राथमिकता से पूरा करें।”
कलेक्टर श्री संदीप जी आर के निर्देश सूरत सिंह दांगी के आवेदन पर त्वरित कार्यवाही करते हुए कागजी कार्यवाही पूरी हुई और शीघ्र ही चमचमाती नई बैटरी वाली ट्राईसाइकिल श्री सूरत सिंह दांगी मिल गई।
ट्राईसाइकिल देखते ही उनकी आंखें छलक आईं। अब सूरत सिंह रोज स्वतंत्र होकर बाजार जाते हैं, परिवार और दोस्तों से मिलते हैं, जीवन का पूरा आनंद ले रहे हैं। वे गांव वालों को बार-बार बताते हैं – “कलेक्टर की जनसुनवाई ने मेरी जिंदगी को नई दिशा दी।” ट्राईसाइकिल पाकर आज सूरत सिंह दांगी खुश हैं और सामान्य रूप से अपने रोजमर्रा के कम कर रहे हैं। वे कलेक्टर एवं शासन का हार्दिक धन्यवाद देते हुए ऐसी जनसुनवाई और संवेदना हर जरूरतमंद तक पहुंचे, यही कामना है।
यह कहानी सिर्फ एक ट्राईसाइकिल की नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की है। कलेक्टर श्री संदीप जी आर के संवेदनशील निर्देश और शासन की त्वरित कारवाही ने एक व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी भर दी।
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