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संभल में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता, कालाबाजारी पर सख्ती के निर्देश

जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक, विक्रेताओं को दिए गए स्पष्ट दिशा-निर्देश

संभल। जनपद संभल में जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में उर्वरक समीक्षा, जिला स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की बैठक तथा उर्वरक विक्रेताओं के लिए फार्मर रजिस्ट्री प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बैठक में जिला कृषि अधिकारी, उप कृषि निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला विकास अधिकारी एवं अर्थ एवं सांख्यिक अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जिला कृषि अधिकारी ने जानकारी दी कि जनपद में वर्तमान में 17,546 मीट्रिक टन यूरिया, 4,326 मीट्रिक टन डीएपी, 18,755 मीट्रिक टन एनपीके सहित कुल 42,583 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जिससे स्पष्ट है कि जिले में उर्वरक की कोई कमी नहीं है।
उन्होंने बताया कि अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पांच निजी उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। इसके अलावा 22 विक्रेताओं तथा 33 सहकारी समितियों को नोटिस जारी किया गया है। सहकारी समितियों से जवाब न मिलने पर उन्हें दो दिन का अतिरिक्त समय साक्ष्यों सहित अपना पक्ष रखने के लिए दिया गया है।
जिला कृषि अधिकारी ने यह भी कहा कि वर्तमान में किसानों को फॉस्फेटिक उर्वरकों की आवश्यकता न्यूनतम है, इसलिए इनका वितरण नियमानुसार किया जाए, ताकि जरूरत के समय पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। शासन के निर्देशानुसार प्रति हेक्टेयर जोत पर 7 बैग यूरिया और 5 बैग फॉस्फेटिक उर्वरक का वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मुख्य विकास अधिकारी ने जिला, तहसील और ब्लॉक स्तरीय उर्वरक निगरानी समितियों को निर्देश दिए कि वे लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर उर्वरकों की ओवररेटिंग और टैगिंग पर रोक सुनिश्चित करें। यदि कोई विक्रेता अनियमितता करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री को लेकर निर्देशित किया कि सभी उर्वरक विक्रेता स्टॉक रजिस्टर के साथ सेल रजिस्टर भी संधारित करें, जिसमें किसानों की रजिस्ट्री का विवरण दर्ज हो। इसकी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
बैठक के दौरान जिला कृषि अधिकारी एवं उप कृषि निदेशक की उपस्थिति में उर्वरक विक्रेताओं को फार्मर रजिस्ट्री के संबंध में प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण में बताया गया कि दुकान पर आने वाले किसानों का पंजीकरण किस प्रकार किया जाए और उन्हें नियमानुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।

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