दो दशकों तक गोलियों, बारूदी सुरंगों और खूनी हमलों से जंगलों में दहशत का साम्राज्य खड़ा करने वाला माओवादी नेटवर्क आखिरकार सुरक्षा बलों के शिकंजे में आ गया। झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन और धनबाद-गिरिडीह पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 2 करोड़ 20 लाख रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) के शीर्ष पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर को उसके चार सहयोगियों के साथ धर दबोचा गया। यह झारखंड के नक्सल विरोधी अभियान की अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई है।
खुफिया सूचना बनी ‘गेम चेंजर’
सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला कि मिसिर बेसरा अपने सहयोगियों के साथ टाटा मैजिक से धनबाद से गिरिडीह की ओर जा रहा है। सूचना मिलते ही धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार और गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने तत्काल संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया। पूरे अभियान की निगरानी सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह और आईजी अभियान नरेंद्र कुमार स्वयं कर रहे थे।
सीमा पर बिछा ऐसा जाल, बच निकलने का नहीं मिला मौका
धनबाद-गिरिडीह सीमा पर संयुक्त सुरक्षा बलों ने पहले से घेराबंदी कर रखी थी। जैसे ही टाटा मैजिक वहां पहुंची, जवानों ने वाहन को चारों ओर से घेर लिया। पहचान की पुष्टि होते ही मिसिर बेसरा और उसके चारों सहयोगियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। पूरे ऑपरेशन में किसी भी प्रकार की फायरिंग की नौबत नहीं आई।
टाटा मैजिक बना चलता-फिरता हथियारों का जखीरा
वाहन की तलाशी में तीन AK-47 राइफलें, कई मैगजीन और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद हुए। शुरुआती जांच में आशंका है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़ी माओवादी वारदात में किया जाना था।
झारखंड में माओवादी नेतृत्व को सबसे बड़ा झटका
मिसिर बेसरा लंबे समय से झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियों का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। उसकी गिरफ्तारी से संगठन की कमान लगभग ध्वस्त हो गया है।पूछताछ से संगठन के शेष नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों और फंडिंग चैनल से जुड़े बड़े खुलासे होंगे
