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कारगिल: श्यामल प्रतीक की नज़र से विशेष कवर स्टोरी | कारगिल विजय श्रृंखला “जब एक घायल सैनिक ने अकेले दुश्मन के बंकर पर धावा बोल दिया” राइफलमैन संजय कुमार (परमवीर चक्र): अदम्य साहस की वह गाथा, जिसने कारगिल विजय का मार्ग प्रशस्त किया

ByAshok Mishra

Aug 5, 2026

श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल संवाददाता, चाणक्य न्यूज़ इंडिया

रक्सौल। विशेष संवाददाता।

भारत के सैन्य इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्हें केवल उनके पद या सम्मान से नहीं, बल्कि उनके अद्वितीय साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण से याद किया जाता है। कारगिल युद्ध के परमवीर चक्र विजेता राइफलमैन संजय कुमार उन्हीं अमर योद्धाओं में शामिल हैं, जिन्होंने असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों में भी पीछे हटने के बजाय विजय का मार्ग चुना।

सन् 1999 में कारगिल युद्ध अपने निर्णायक दौर में था। पाकिस्तानी सैनिक ऊँची चोटियों पर मजबूत मोर्चों में बैठे थे और भारतीय सेना को लगातार भारी गोलीबारी का सामना करना पड़ रहा था। दुश्मन की मशीनगन पोस्ट भारतीय जवानों की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी थी। हर आगे बढ़ता कदम मौत को चुनौती देने जैसा था।

ऐसे कठिन समय में 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स के जवान राइफलमैन संजय कुमार ने स्वेच्छा से आगे बढ़ने का निर्णय लिया। उन्होंने अकेले दुश्मन की ओर बढ़ते हुए भीषण गोलीबारी का सामना किया। रास्ते में वे गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन उनका संकल्प नहीं डिगा। उन्होंने दुश्मन के पहले बंकर पर धावा बोलकर उसे अपने कब्ज़े में लिया और फिर दुश्मन की मशीनगन छीनकर उसी हथियार से दूसरे बंकर पर हमला कर दिया। उनके इस साहसिक अभियान ने भारतीय सेना के लिए आगे बढ़ने का मार्ग खोल दिया और अभियान को निर्णायक बढ़त दिलाई।

राइफलमैन संजय कुमार की वीरता केवल युद्ध कौशल का उदाहरण नहीं थी, बल्कि यह उस भारतीय सैनिक की भावना का प्रतीक थी, जो अपने प्राणों से पहले राष्ट्र को रखता है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और अपने साथियों के साथ अंतिम लक्ष्य प्राप्त होने तक डटे रहे।

उनके असाधारण साहस, अद्वितीय पराक्रम और कर्तव्य के प्रति सर्वोच्च निष्ठा के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान “परमवीर चक्र” प्रदान किया। वे कारगिल युद्ध के उन चार वीरों में शामिल हैं जिन्हें यह सर्वोच्च अलंकरण प्राप्त हुआ।

कारगिल की सीख

राइफलमैन संजय कुमार की कहानी केवल एक सैनिक की वीरगाथा नहीं है। यह हर भारतीय को यह संदेश देती है कि राष्ट्र की रक्षा केवल हथियारों से नहीं होती, बल्कि साहस, अनुशासन, त्याग और अटूट संकल्प से होती है। जब उद्देश्य मातृभूमि की रक्षा हो, तब कोई भी बाधा असंभव नहीं रहती।

आज का प्रेरक संदेश

“वीरता पद से नहीं, कर्तव्य से जन्म लेती है। राइफलमैन संजय कुमार ने अपने साहस से यह सिद्ध किया कि एक सैनिक का सबसे बड़ा हथियार उसका राष्ट्रप्रेम होता है।”

श्रद्धांजलि

“कारगिल की चोटियाँ आज भी उस अमर वीर की पदचाप महसूस करती हैं, जिसने घायल होने के बाद भी विजय का रास्ता बनाया। जब भी टाइगर हिल और पॉइंट 4875 पर तिरंगा लहराता है, उसमें राइफलमैन संजय कुमार जैसे वीरों का साहस और बलिदान भी लहराता है।”

अंतिम शब्द

“कारगिल की बर्फ आज भी पिघलती है, लेकिन उन वीरों की गाथाएँ कभी नहीं पिघलतीं। आने वाली पीढ़ियाँ जब भी कारगिल का इतिहास पढ़ेंगी, तो राइफलमैन संजय कुमार का नाम केवल एक सैनिक के रूप में नहीं, बल्कि उस योद्धा के रूप में याद करेंगी जिसने घायल शरीर के साथ भी विजय का मार्ग प्रशस्त किया। भारत ऐसे वीरों का सदैव ऋणी रहेगा।”

✍️ श्यामल प्रतीक

रक्सौल अनुमंडल संवाददाता, चाणक्य न्यूज़ इंडिया

विशेष ऐतिहासिक श्रृंखला

“कारगिल: श्यामल प्रतीक की नज़र से”

“वीरता, बलिदान और भारत की अमर विजय की अनकही दास्तान”

🇮🇳 जय हिन्द। वन्दे मातरम्। भारत माता की जय।

By Ashok Mishra

Ashok Mishra is the Editor-in-Chief of Chanakya News India, a Hindi digital news platform established in 2012. The organization focuses on delivering verified breaking news, live news coverage, crime, entertainment, business, technology, and regional updates across India. Address: FNG vihar 2 sector 121 Gautam budhnagar Uttar pradesh, India Email -mpcgchanakyanewsindia@gmail.com Phone– +91 9315744968

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