मानवता की मिसाल पेश करते हुए अंकुरण परिवार ने एक बार फिर अपना परिवार धर्म निभाते हुए एक लावारिस एवं असहाय व्यक्ति का पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराया। इसके साथ ही संस्था ने अब तक 70 लावारिस एवं निराश्रित शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का मानवीय सेवा का एक और पड़ाव पूरा किया।
मृतक अपना नाम संजीव (संजू) बताया करता था। लगभग तीन वर्ष पूर्व उसे गोरखपुर से अमेठी मानसिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। वह तपेदिक (टीबी) से पीड़ित था और पिछले तीन वर्षों से उसका उपचार चल रहा था। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के दौरान उसने अंतिम सांस ली।
मानसिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा सूचना दिए जाने के बाद आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया, पंचनामा एवं पोस्टमार्टम पूर्ण होने पर दिनांक 5 अगस्त 2026 को हथियानाला स्थित श्मशान घाट पर अंकुरण परिवार ने पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संजू का अंतिम संस्कार कराया।
मो. आरिफ खान एवं डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। इस अवसर पर संस्था के अनुराग श्रीवास्तव, बृजेश सिंह एवं प्रज्ज्वल श्रीवास्तव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
मीडिया प्रभारी दीपक जायसवाल ने बताया कि अंकुरण परिवार का विश्वास है कि “जिसकी अंतिम यात्रा में कोई अपना न हो, वहाँ मानवता ही परिवार बन जाती है।” इसी भावना के साथ संस्था वर्षों से निराश्रित एवं लावारिस लोगों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार का दायित्व निभा रही है। संस्था का उद्देश्य केवल अंतिम संस्कार कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इस संसार से विदा होने वाला कोई भी व्यक्ति सम्मान और मानवीय गरिमा से वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि अंकुरण परिवार आगे भी निस्वार्थ भाव से सेवा, संवेदना और मानवता के इस अभियान को निरंतर जारी रखेगा, क्योंकि “मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है, और किसी अनजान व्यक्ति को भी सम्मानजनक अंतिम विदाई देना सबसे बड़ा मानवीय कर्तव्य है।
