मुनाफा सीमेंट संयंत्रों का, मुसीबत में राहगीर: रिसदा बाईपास की 300 मीटर सड़क बनी जानलेवा दलदल
10 दिन पहले हुई मरम्मत भी नहीं टिक पाई, तीन दिन से गड्ढे में फंसा कोयले से लदा ट्रेलर; ग्रामीणों ने दी आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | हिमांशु शुक्ला | बलौदाबाजार-भाटापारा से | ग्राउंड रिपोर्टिंग
बलौदाबाजार। जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर बलौदाबाजार-सिमगा मार्ग पर स्थित रिसदा बाईपास चौक से ग्राम रिसदा के बीच लगभग 300 मीटर सड़क की बदहाली राहगीरों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, कीचड़ और पानी भरने से आवागमन जोखिम भरा हो गया है। स्थिति यह है कि स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले तीन दिनों से कोयले से लदा एक भारी ट्रेलर सड़क के गहरे गड्ढे में फंसा हुआ है, जिससे मार्ग पर आवागमन और अधिक प्रभावित हो रहा है।
10 दिन पहले की मरम्मत भी बेअसर
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 10 दिन पहले सड़क पर रोड रोलर चलाकर गड्ढों की लेवलिंग की गई थी, लेकिन भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के बाद सड़क फिर से उखड़ गई। अब मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे और कीचड़ जमा होने से दोपहिया वाहन चालकों, साइकिल सवारों और अन्य राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले भारी वाहनों के कारण सड़क की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क की मरम्मत केवल औपचारिकता के तौर पर न की जाए, बल्कि टिकाऊ निर्माण के साथ समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
स्कूल बसों और एंबुलेंस की आवाजाही पर भी खतरा
सड़क की बदहाल स्थिति से स्कूली बच्चों, वाहन चालकों और मरीजों को लेकर आने-जाने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कीचड़ और पानी से भरे गड्ढों के बीच वाहनों को निकालना मुश्किल हो रहा है। सड़क संकरी होने और भारी ट्रेलर फंसे होने से दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क को दुरुस्त नहीं किया गया, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन को तत्काल मौके का निरीक्षण कर यातायात सुरक्षित बनाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
छह सीमेंट संयंत्रों की आवाजाही, फिर भी सड़क बेहाल
रिसदा क्षेत्र में संचालित लगभग छह सीमेंट संयंत्रों से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही के कारण इस मार्ग का महत्व काफी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि संयंत्रों के अधिकारी और अन्य वाहन भी इसी रास्ते से गुजरते हैं, इसके बावजूद सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े भारी यातायात के अनुरूप सड़क की मजबूती और रखरखाव की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग और संयंत्र प्रबंधन आपसी समन्वय से सड़क सुधारने के लिए ठोस पहल करें।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी
सड़क की बदहाली से नाराज ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गड्ढों को भरने और मार्ग को दुरुस्त करने का काम शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क की समस्या का समाधान जनसुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
लोक निर्माण विभाग ने दिया निरीक्षण का आश्वासन
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता अनुज शर्मा ने कहा, “मैं जल्दी ही एसडीओ को मौके पर भेजकर पूरी जानकारी लेता हूं। मार्ग में जहां-जहां ज्यादा समस्या है, उन्हें तत्काल दूर करने के लिए निर्देशित कर देता हूं।”
अब देखना होगा कि विभागीय निरीक्षण के बाद सड़क सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और राहगीरों को इस परेशानी से कब तक राहत मिलती है।
जनहित का सवाल: क्या औद्योगिक गतिविधियों और भारी वाहनों के दबाव वाले इस मार्ग की स्थायी मरम्मत होगी, या ग्रामीणों को अपनी मांगों के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा?
