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संभल की धरोहर को नया जीवन: 9 महीने में चमका कारवां सराय गेट

एएसआई के संरक्षण से लौटी शाहजहांकालीन भव्यता, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

संभल, 14 अप्रैल। सोंधन मुहम्मदपुर स्थित ऐतिहासिक कारवां सराय का प्रवेश द्वार अब एक बार फिर अपनी पुरानी शान में नजर आ रहा है। शाहजहां कालीन इस धरोहर का जीर्णोद्धार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) मेरठ मंडल द्वारा करीब नौ महीने के भीतर सफलतापूर्वक पूरा किया गया। 13 जून 2025 से शुरू हुआ यह कार्य 27 फरवरी 2026 को संपन्न हुआ, जिससे जिले की ऐतिहासिक पहचान को नया जीवन मिला है।
एएसआई द्वारा पारंपरिक तकनीकों के उपयोग से इस स्मारक की मूल संरचना और सुंदरता को बरकरार रखते हुए पुनर्स्थापित किया गया है। केंद्रीय मार्ग, दो मंजिला पहरेदार कक्ष, मेहराबदार द्वार और सीढ़ियों की संरचना अब फिर से अपनी भव्यता बिखेर रही है। पहले जहां यह स्थल जर्जर और उपेक्षित था, वहीं अब यह एक सुरक्षित और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है।
इस परियोजना की सफलता में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व में स्मारक के आसपास हुए अतिक्रमण को शांतिपूर्वक हटाया गया, जिससे संरक्षण कार्य में कोई बाधा नहीं आई और निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा हो सका।
कारवां सराय के इस कायाकल्प से जिले में पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल स्थानीय लोगों को अपनी विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे। स्मारक की देखरेख के लिए भविष्य में कर्मचारी नियुक्ति की योजना भी बनाई जा रही है।
इसके साथ ही एएसआई ने जिले के पांच अन्य ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की भी तैयारी शुरू कर दी है। इनमें कारवां सराय की मस्जिद, फिरोजपुर का किला, चंदायन का चंद्रेश्वर खेड़ा और गुमथल खेड़ा के प्राचीन टीले शामिल हैं। यह पहल संभल को एक प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।