टोंक/पीपलू एनएच-52 निर्माण कार्य अब सड़क से ज्यादा “पत्थर खेल” को लेकर चर्चा में आ गया है। चिरोज बोरखण्डी वन नाका सोहेला क्षेत्र में पहाड़ की करीब एक बीघा सरकारी भूमि पर मौजूद लाखों रुपए कीमत के कीमती पत्थरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि हाईवे निर्माण की आड़ में ठेकेदार ने पहाड़ को ही “माल” समझ लिया और सरकारी संपदा पर बुलडोजर चला दिया।
चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि पहाड़ पर करीब 10 फीट ऊंचाई तक मौजूद कीमती पत्थरों को नियमानुसार सुरक्षित रखने या नीलामी कर राजस्व में जमा करने के बजाय खुर्द-बुर्द कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब तक वन विभाग की नींद खुलती, तब तक करीब 10 ट्रॉली पत्थर ठेकेदार अपने काम में खपा चुका था। सूत्रों की मानें तो मीडिया में मामला उछलने के बाद वन विभाग हरकत में आया और ठेकेदार को चेताया गया। लेकिन इसके बाद कहानी में नया मोड़ आ गया। बताया जा रहा है कि ठेकेदार ने वन विभाग को कह दिया – “जो पत्थर बचे हैं, वो विभाग को सुपुर्द कर देंगे।” इसके बाद सवालों की बौछार शुरू हो गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 10 ट्रॉली पत्थर पहले ही उपयोग में ले लिए गए तो उनकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या सरकारी संपदा पहले इस्तेमाल होगी और बाद में कागज पूरे होंगे? मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों आनंद गोपाल, रामनरेश, किशन और हरिराम ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में वन विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। लोगों का कहना है कि यदि लाखों के पत्थर मौजूद थे तो उनका रिकॉर्ड कहां है? नीलामी क्यों नहीं हुई? और यदि पत्थर तोड़ने की अनुमति थी तो आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
इधर एक और बड़ा आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि वन नाका सोहेला से लेकर रेंजर स्तर तक कथित मिलीभगत के चलते कार्रवाई ठंडी पड़ी रही।
लोग पूछ रहे हैं – “क्या वन क्षेत्र अब हाईवे ठेकेदारों के लिए खुली खदान बन गया है?”
मामले में जिला कलेक्टर टीना डाबी से संज्ञान लेने की मांग उठने लगी है। क्षेत्र में अब निगाहें सीसीएफ अजमेर पर टिकी हैं कि क्या वे इस कथित “पत्थर खेल” की परतें खोलेंगे या फिर फाइलों में पहाड़ की तरह मामला भी दब जाएगा।
इनका कहना है:
“नेशनल हाईवे ठेकेदार द्वारा तोड़े जा रहे पहाड़ के पत्थरों को वन विभाग की सुपुर्दगी में लिया जाएगा।”
— टोंक रेंजर अभिषेक भटनागर
टोंक से एस रहमान।एनएच-52 की आड़ में पहाड़ ही आधा खत्म हो गया है और अधिकारी जेब भरने मे लगे हुए हैं।‘पत्थर खेल’! 10 ट्रॉली गायब, वन विभाग की नींद खुली तो ठेकेदार बोला– अब ले लो वापस ,यह सब प्रशासन की मिली भगत से ही संभव हो सका है।
