मकोका और NDPS लगाने की धमकी देकर इनोवा में ले गए बदमाश, लोकल पुलिस की बात सुनते ही दुम दबाकर भागे
देहरादून। राजधानी के पटेलनगर थाना क्षेत्र से अपहरण और रंगदारी मांगने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर बताकर कुछ शातिर बदमाशों ने एक नामचीन कारोबारी को उनके ही दफ्तर से अगवा कर लिया। गाड़ी में बंधक बनाकर पिस्टल की नोक पर कारोबारी को मकोका और एनडीपीएस एक्ट के झूठे मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई और मामले को रफा-दफा करने के एवज में 25 लाख रुपये की मोटी रकम मांगी गई। हालांकि, पीड़ित के परिजनों की सूझबूझ और स्थानीय पुलिस को बुलाने की बात सुनते ही फर्जी इंस्पेक्टर और उसकी गैंग के हौसले पस्त हो गए और वे मौके से फरार हो गए। पीड़ित की तहरीर पर पटेलनगर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फिल्मी अंदाज में दफ्तर में घुसे बदमाश, छीना मोबाइल
जीएमएस रोड स्थित मोहित विहार निवासी कारोबारी सिद्धार्थ अग्रवाल पुत्र प्रदीप अग्रवाल का पटेलनगर के डी-5 इंडस्ट्रियल एरिया में प्रतिष्ठान है। पीड़ित के मुताबिक, 25 जून की दोपहर करीब दो बजे जब वह लंच के लिए घर निकलने वाले थे, तभी एक यूपी नंबर (UP-16BR-9271) की इनोवा कार उनके गेट पर आकर रुकी। गाड़ी से तीन पुरुष और एक महिला उतरे। उनमें से एक ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर रंजीत कांसले बताया। बदमाशों ने सिद्धार्थ की फोटो खींची, उनका मोबाइल छीन लिया और पूछताछ के बहाने जबरन गाड़ी में बैठाकर अगवा कर लिया।
सहारनपुर चौक के होटल के बाहर हुई ‘डील’
अपहरणकर्ता सिद्धार्थ को बंधक बनाकर सहारनपुर चौक स्थित होटल एलेसी के बाहर ले गए। वहां गाड़ी के भीतर ही कारोबारी पर मानसिक दबाव बनाया गया। गाड़ी में मौजूद सुनीता नाम की महिला और एक अन्य साथी ने सिद्धार्थ को डराया कि तुम्हारे खिलाफ मुंबई में आदित्य पांडेय नाम के व्यक्ति ने बड़ी धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। यदि कोर्ट-कचहरी के चक्कर से बचना है तो ‘साहब’ से सेटलमेंट कर लो। कथित इंस्पेक्टर रंजीत कांसले ने धमकी दी कि यदि 25 लाख रुपये नहीं दिए, तो उसे दिल्ली के सेफ हाउस और फिर मुंबई ले जाकर मकोका व एनडीपीएस जैसी गंभीर धाराओं में जेल भेज दिया जाएगा।
पिता और पड़ोसियों की सूझबूझ से नाकाम हुई साजिश
सिद्धार्थ के बार-बार मिन्नतें करने पर बदमाश दोपहर करीब 3:30 बजे उसे वापस उसके प्रतिष्ठान लेकर आए ताकि रकम का इंतजाम हो सके। सिद्धार्थ ने चालाकी से अपने भाई को फोन कर हार्ट पेशेंट पिता को पड़ोस के व्यापारियों के साथ वहां बुला लिया।
लोकल पुलिस का नाम सुनते ही उड़े होश
कारोबारी के पिता और पड़ोस के दुकानदारों ने जब कथित इंस्पेक्टर से उसकी आईडी (पहचान पत्र) मांगी और पूछा कि कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को साथ क्यों नहीं लाए? तो आरोपी घबरा गए। उन्होंने बात को घुमाने की कोशिश की और कहा कि वे सिर्फ बयान लेने आए थे। जैसे ही परिजनों ने कहा कि स्थानीय पुलिस के आने पर ही बयान दर्ज होंगे, फर्जी इंस्पेक्टर और उसकी टीम गाड़ी में सवार होकर तुरंत वहां से रफूचक्कर हो गई।
जांच में खुला राज: बर्खास्त पुलिसकर्मी है मास्टरमाइंड
पीड़ित ने जब अपने स्तर से इस मामले की पड़ताल की, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। खुद को मुंबई पुलिस का इंस्पेक्टर बताने वाला रंजीत कांसले असल में महाराष्ट्र पुलिस का बर्खास्त कर्मचारी निकला, जो एक शातिर अपराधी है और उस पर पहले भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने किसी करीबी के साथ मिलकर कारोबारी की रेकी की थी।
सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हवाले
पीड़ित सिद्धार्थ अग्रवाल ने शनिवार (27 जून) को पटेलनगर थाने में लिखित तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वारदात के समय की पूरी सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को सौंप दी गई है, जिसमें आरोपियों के चेहरे और गाड़ी का नंबर साफ नजर आ रहे हैं। पुलिस फुटेज के आधार पर बदमाशों की तलाश में जुट गई है। #DehradunProperties #DoonPolice #dehradun #mumbaicrimebranch #fakecrimebranch #विवेक त्रिपाठी स्टेट हेड #चाणक्य न्यूज इंडिया #उत्तराखंड
