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कारगिल: श्यामल प्रतीक की नज़र से विशेष कवर स्टोरी | दिवस–5 “आख़िरी साँस तक लड़ता रहा वह शेर”

ByAshok Mishra

Aug 5, 2026

कारगिल: श्यामल प्रतीक की नज़र से

विशेष कवर स्टोरी | दिवस–5

“आख़िरी साँस तक लड़ता रहा वह शेर”

कैप्टन अनुज नैयर, महावीर चक्र (मरणोपरांत): जिसने विजय के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया

श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल संवाददाता, चाणक्य न्यूज़ इंडिया

विशेष संवाददाता | कारगिल विजय श्रृंखला

कारगिल युद्ध का इतिहास केवल उन चोटियों का इतिहास नहीं है, जहाँ विजय का तिरंगा फहराया गया। यह उन वीरों का इतिहास भी है जिन्होंने यह जानते हुए कि मृत्यु सामने खड़ी है, फिर भी पीछे हटने से इनकार कर दिया।

ऐसे ही अमर योद्धाओं में एक नाम है—कैप्टन अनुज नैयर।

उन्होंने केवल दुश्मन के बंकरों पर हमला नहीं किया, बल्कि अपने अदम्य साहस से भारतीय सेना के इतिहास में अमर स्थान प्राप्त किया।

बचपन का सपना—भारतीय सेना

दिल्ली में जन्मे अनुज नैयर बचपन से ही भारतीय सेना की वर्दी पहनने का सपना देखते थे। उनका विश्वास था कि जीवन का सबसे बड़ा सम्मान मातृभूमि की सेवा में है।

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे 17 जाट रेजिमेंट में नियुक्त हुए। कम समय में ही उन्होंने अपने नेतृत्व, अनुशासन और निर्भीकता से साथियों का विश्वास जीत लिया।

पॉइंट 4875 की निर्णायक लड़ाई

जुलाई 1999।

कारगिल युद्ध अपने सबसे कठिन चरण में था।

पॉइंट 4875 पर दुश्मन ने कई मजबूत बंकर बना रखे थे। भारतीय सेना की प्रगति रोकने के लिए लगातार भारी गोलीबारी हो रही थी।

कैप्टन अनुज नैयर ने अपने दस्ते का नेतृत्व करते हुए एक-एक कर दुश्मन के कई बंकरों पर कब्ज़ा किया।

जब अंतिम और सबसे मजबूत बंकर पर हमला किया गया, तब वे दुश्मन की गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हो गए।

लेकिन अंतिम क्षण तक उन्होंने अपने साथियों का मनोबल टूटने नहीं दिया।

उनके नेतृत्व ने भारतीय सेना को निर्णायक बढ़त दिलाई।

महावीर चक्र से सम्मानित

असाधारण वीरता, अद्वितीय नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए कैप्टन अनुज नैयर को मरणोपरांत भारत के दूसरे सर्वोच्च वीरता सम्मान महावीर चक्र से अलंकृत किया गया।

आज उनका नाम भारतीय सेना के उन अमर अधिकारियों में लिया जाता है जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।

एक सैनिक कभी नहीं मरता

कैप्टन अनुज नैयर का जीवन हमें यह सिखाता है कि—

> “एक सैनिक की सबसे बड़ी पहचान उसकी आयु नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए उसका समर्पण होता है।”

उन्होंने अपने जीवन से सिद्ध कर दिया कि देशभक्ति शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म और बलिदान से सिद्ध होती है।

श्रद्धांजलि

> “कारगिल की चट्टानें आज भी उस युवा अधिकारी की गवाही देती हैं, जिसने विजय के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। जब भी पॉइंट 4875 पर तिरंगा लहराता है, उसमें कैप्टन अनुज नैयर का साहस, नेतृत्व और बलिदान भी लहराता है।”

अंतिम शब्द…

> “कभी-कभी इतिहास किसी एक व्यक्ति के निर्णय से बदल जाता है। कैप्टन अनुज नैयर का वह निर्णय—आगे बढ़ने का, पीछे न हटने का और आख़िरी साँस तक लड़ने का—भारत की विजय का हिस्सा बन गया।”

 

> “कारगिल की बर्फ़ आज भी पिघलती है, लेकिन उन वीरों की कहानियाँ कभी नहीं पिघलतीं। आने वाली पीढ़ियाँ जब भी कारगिल का इतिहास पढ़ेंगी, कैप्टन अनुज नैयर का नाम उन्हें यह याद दिलाएगा कि भारत की सीमाएँ केवल हथियारों से नहीं, बल्कि अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के साहस से सुरक्षित हैं|

🇮🇳 विनम्र श्रद्धांजलि

> “जब तक हिमालय की चोटियाँ अडिग रहेंगी और भारत का तिरंगा आकाश में लहराता रहेगा, तब तक कैप्टन अनुज नैयर का नाम भारत के वीरता इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।”

अगली कड़ी…

मेजर राजेश सिंह अधिकारी, महावीर चक्र (मरणोपरांत)

“जिसने टोलोलिंग की लड़ाई में अपने साहस से विजय की पहली नींव रखी।”

श्यामल प्रतीक

रक्सौल अनुमंडल संवाददाता, चाणक्य न्यूज़ इंडिया

विशेष ऐतिहासिक श्रृंखला
“कारगिल: श्यामल प्रतीक की नज़र से”
“वीरता, बलिदान और भारत की अमर विजय की अनकही दास्तान”

By Ashok Mishra

Ashok Mishra is the Editor-in-Chief of Chanakya News India, a Hindi digital news platform established in 2012. The organization focuses on delivering verified breaking news, live news coverage, crime, entertainment, business, technology, and regional updates across India. Address: FNG vihar 2 sector 121 Gautam budhnagar Uttar pradesh, India Email -mpcgchanakyanewsindia@gmail.com Phone– +91 9315744968

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