भारत-अमेरिका की सेनाओं ने साथ दिखाई युद्धक तैयारी
BIKANER महाजन फायरिंग रेंज पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, ‘युद्ध अभ्यास-2026’ में सैनिकों का प्रशिक्षण और आपसी तालमेल देखा
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | विशेष रिपोर्ट
श्यामल प्रतीक
BIKANER/नई दिल्ली। राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय और अमेरिकी सैनिकों के संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण की तस्वीर गुरुवार को उस समय खास बन गई, जब भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर दोनों देशों के जवानों के बीच पहुंचे। उन्होंने ‘युद्ध अभ्यास-2026’ के तहत चल रहे प्रशिक्षण को करीब से देखा और सैनिकों से बातचीत कर उनकी तैयारियों, कौशल तथा सैन्य उपकरणों की जानकारी ली।
BIKANER महाजन के विशाल प्रशिक्षण क्षेत्र में दोनों देशों के सैनिक एक साथ अलग-अलग सैन्य परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास कर रहे हैं। संयुक्त प्रशिक्षण का मुख्य जोर इस बात पर है कि आवश्यकता पड़ने पर भारतीय और अमेरिकी सेनाएं योजना बनाने से लेकर मैदानी अभियान तक बेहतर तालमेल के साथ काम कर सकें। अभ्यास के दौरान आधुनिक सैन्य तकनीक, निगरानी प्रणालियों और संयुक्त अभियानों से जुड़े प्रशिक्षण को भी प्रमुखता दी गई है।
सर्जियो गोर ने भारतीय और अमेरिकी सैनिकों को एक साथ प्रशिक्षण लेते हुए देखने के बाद दोनों देशों की रक्षा साझेदारी में विश्वास, तैयारी, पारस्परिक संचालन क्षमता और साझा उद्देश्य को महत्वपूर्ण बताया। उनकी यात्रा ऐसे समय हुई है जब दोनों सेनाएं उत्तराखंड के औली से लेकर राजस्थान के महाजन तक अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में संयुक्त अभ्यास कर रही हैं।
600-600 सैनिक ले रहे हिस्सा
‘युद्ध अभ्यास’ भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच लंबे समय से आयोजित होने वाला प्रमुख द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है। इस वर्ष इसका 22वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारतीय सेना और अमेरिकी सेना के लगभग 600-600 जवान इसमें भाग ले रहे हैं। अभ्यास की शुरुआत 15 सितंबर को उत्तराखंड के औली में हुई, जबकि प्रशिक्षण गतिविधियां औली के साथ राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी चल रही हैं।
औली में पर्वतीय परिस्थितियों में सैन्य संचालन, संयुक्त योजना और आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है, जबकि महाजन में आधुनिक हथियार प्रणालियों और संयुक्त युद्धक क्षमताओं के प्रदर्शन को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों के जरिए निगरानी तथा टोही जैसे आधुनिक सैन्य पहलुओं को भी अभ्यास में शामिल किया गया है।
एक-दूसरे के उपकरण और तकनीक को समझ रहे जवान
अभ्यास की एक महत्वपूर्ण विशेषता दोनों सेनाओं के बीच तकनीकी और पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान भी है। अमेरिकी सेना के आधिकारिक विवरण के अनुसार भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने एक-दूसरे के सैन्य उपकरणों, वाहनों तथा ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों को करीब से समझा। इसका उद्देश्य किसी संयुक्त अभियान के दौरान दोनों सेनाओं के जवानों को एक-दूसरे की क्षमताओं और कार्यप्रणाली से परिचित कराना है।
इसके अलावा कमान स्तर पर भी दोनों देशों के अधिकारी साझा सैन्य योजना तैयार करने का अभ्यास कर रहे हैं। ब्रिगेड स्तर के कमांड पोस्ट अभ्यास के माध्यम से योजना और मैदानी प्रशिक्षण को आपस में जोड़ा गया है, ताकि मुख्यालय से लेकर छोटी सैन्य टुकड़ियों तक समन्वय को परखा जा सके।
हाल के प्रशिक्षण में दोनों सेनाओं के सैनिकों ने संयुक्त हवाई अभियान की तैयारी, जंगल क्षेत्र में सामरिक गतिविधियों तथा ड्रोन आधारित निगरानी जैसे विभिन्न प्रशिक्षण भी किए हैं। इसका व्यापक उद्देश्य केवल उपकरणों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक-दूसरे की रणनीतियों और कार्यप्रणाली को समझते हुए संयुक्त अभियान क्षमता विकसित करना है।
रक्षा सहयोग की मजबूत होती कड़ी
भारत और अमेरिका के बीच ‘युद्ध अभ्यास’ वर्ष 2004 से आयोजित किया जा रहा है। समय के साथ इसका स्वरूप प्रशिक्षण के सामान्य आदान-प्रदान से आगे बढ़कर संयुक्त योजना, आधुनिक तकनीक और जटिल सैन्य परिस्थितियों में आपसी समन्वय तक विस्तृत हुआ है। अमेरिकी सेना इसे दोनों देशों की सेनाओं के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता और पेशेवर सहयोग बढ़ाने वाला प्रमुख मंच बताती है।
BIKANER महाजन में सर्जियो गोर की मौजूदगी के बीच भारतीय और अमेरिकी सैनिकों का संयुक्त प्रशिक्षण इसी विकसित होती सैन्य साझेदारी की तस्वीर पेश करता है—जहां दोनों सेनाएं अपने अनुभव साझा करने के साथ भविष्य के जटिल अभियानों में बेहतर तालमेल स्थापित करने की क्षमता पर भी काम कर रही हैं।
