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*छह माह बाद भी नहीं बदला जा सका शिकायत पट्ट, जिम्मेदार बने निरंकुश*

BySantosh Kumar Pandey

Aug 7, 2026

*पूर्व प्राचार्य का नंबर अब भी प्रदर्शित, मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर उठ रहा सवाल।*
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। जिला महिला चिकित्सालय के एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड हेल्थ) विंग स्थित ऑपरेशन थिएटर के बाहर लगा शिकायत संबंधी सूचना पट्ट पिछले छह माह से अद्यतन नहीं किया गया है। इस पर अभी भी पूर्व प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव का मोबाइल नंबर प्रदर्शित हो रहा है, जबकि वे फरवरी-मार्च 2026 से प्राचार्य पद पर नहीं हैं। मरीजों और तीमारदारों की शिकायतों के निस्तारण के उद्देश्य से लगाए गए इस सूचना पट्ट पर पुराने अधिकारी का संपर्क विवरण बने रहना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। सवाल यह है कि जब संस्थान में प्राचार्य बदल चुके हैं, तब भी सार्वजनिक सूचना पट्टों को अद्यतन कराने की जिम्मेदारी आखिर किसने नहीं निभाई ? यदि कोई शिकायतकर्ता पुराने नंबर पर संपर्क करता है, तो उसकी शिकायत का क्या होगा, इसकी जवाबदेही तय नहीं है। सरकारी अस्पतालों में शिकायत निवारण व्यवस्था की विश्वसनीयता सही और अद्यतन सूचनाओं पर निर्भर करती है। ऐसे में महीनों तक पुरानी जानकारी प्रदर्शित रहना न केवल मरीजों और उनके परिजनों को भ्रमित करता है, बल्कि संस्थान की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। गौरतलब है कि स्थानीय निवासी भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव से जुड़े कुछ मामलों और शिकायतों को लेकर पहले भी विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं होती रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके संबंध में लोकायुक्त तथा विभागीय स्तर पर जांच चल रही है। हालांकि, इन जांचों के निष्कर्ष पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य प्रशासन से जुड़े जानकारों का कहना है कि सरकारी संस्थानों में लगे सभी सूचना पट्टों का नियमित सत्यापन और समयबद्ध अद्यतन किया जाना प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसमें लापरवाही से शिकायत निवारण व्यवस्था प्रभावित होती है और आमजन का भरोसा भी कमजोर पड़ता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर छह माह बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की नजर इस गंभीर चूक पर क्यों नहीं पड़ी ? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी सूचना पट्टों की समीक्षा नहीं की, या फिर व्यवस्था को अद्यतन रखना उनकी प्राथमिकता में ही नहीं है ? यही नहीं देखा जाए तो सोशल मीडिया पर व्हाट्स ऐप पर बनाया गया मीडिया बुलेटिन एएसएमसी सुलतानपुर के ग्रुप पर जारी खबरो में भी पूर्व प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव का नाम जोड़कर जी हजूरी की खबरें भी भेजी जा रही है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय निवासी होने के नाते भ्रष्टचार के आरोपी डॉक्टर का अभी भी मेडिकल कॉलेज में रसूख और दबदबा कायम है। और मेडिकल कॉलेज के ज़िम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी नतमस्तक बने हुए है।

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