चंद्र प्रकाश पुरोहित ब्यूरो जैसलमेर/BIKANER की विशेष रिपोर्ट
बीकानेर से
अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का भव्य आगाज,
BIKANER Camel Festival: बीकानेर में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव की शुरुआत शुक्रवार को हेरिटेज वॉक से हुई,

जिसमें बीकानेरी संस्कृति, स्थापत्य कला और खानपान की झलक देखने को मिली।
मूंछों पर ताव देते रोबीले चेहरे, बड़ी पगड़ियों में सजे युवा, तांगों पर सवार अधिकारी और सैलानी…। हवेलियों के शहर में शुक्रवार को परंपरा, संस्कृति और अपनायत एक साथ चलती नजर आई। अवसर था तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव के शुभारंभ का, जिसकी शुरुआत नगर सेठ लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर से आयोजित हेरिटेज वॉक के साथ हुई
हेरिटेज वॉक का शुभारंभ केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास और जिला कलक्टर नम्रता वृष्णि ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल राठौड़ ने की। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव बीकानेर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हजार हवेलियों वाले इस शहर की विरासत को सुरक्षित रखने में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि हेरिटेज वॉक के जरिए बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेगी।
रेगिस्तान की शान और राजस्थान की पहचान—ऊँट।

बीकानेर में एक बार फिर रंग, संस्कृति और परंपरा का भव्य संगम देखने को मिल रहा है।
जी हां, हम बात कर रहे हैं बीकानेर कैमल फेयर की, जहां देश-विदेश से पर्यटक जुटे हैं।

बीकानेर का कैमल फेयर केवल एक मेला नहीं, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव है।
हर साल आयोजित होने वाला यह मेला इस बार भी भव्यता के साथ सजा है, जहां सजे-धजे ऊँट, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां और पारंपरिक प्रतियोगिताएं पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।
ऊँट सजावट प्रतियोगिता, ऊँट नृत्य, ऊँट दौड़ और ऊँट सुंदरता प्रतियोगिता मेले का मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं।
दूर-दराज़ के गांवों से आए पशुपालक अपने ऊँटों के साथ मेले में हिस्सा ले रहे हैं
कालबेलिया नृत्य, घूमर और राजस्थानी वाद्य यंत्रों की गूंज हर किसी को मंत्रमुग्ध कर रही है।
पर्यटकों के लिए पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प और ऊँट सफारी भी खास आकर्षण हैं।

“यह मेला बहुत ही अनोखा है। ऊँटों की सजावट और यहां की संस्कृति हमें बेहद पसंद आई।”
“हम हर साल यहां आते हैं। इससे हमारी परंपरा भी जीवित रहती है और रोज़गार भी मिलता

