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बाल साहित्य में अमीरों को खलनायक दिखाने पर सवाल:कहानियों में रईसों को लालची दिखाने का ट्रेंड, विशेषज्ञ बोले- बच्चों में बढ़ेगी धन से नफरत

ByAshok Mishra

Jul 18, 2026

अब बच्चों की किताबों की काल्पनिक दुनिया बदल रही है। आज की बाल कहानियों में अमीर किरदारों को खलनायक के रूप दिखाने का ट्रेंड बढ़ा है। बाल साहित्य में रईस किरदारों को बेहद चालाक, लालची और नैतिक रूप से भ्रष्ट के रूप में पेश किया जा रहा है। परोपकारी और बड़े दिल वाले अमीरों की कहानियां किताबों से गायब हो चुकी हैं।

लेखकों और बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, आजकल बाल कथाओं में अमीर पात्र लालची बिल्डर, बेईमान कारोबारी या स्वार्थी उद्योगपति के रूप में दिखाए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर लूसी स्ट्रेंज के नए उपन्यास ‘मर्डर ऑन मिडसमर नाइट’ में धनी कारोबारी की हत्या पर किसी पात्र को अफसोस नहीं होता। वहीं नताशा फैरेंट की ‘द रेस्क्यू ऑफ रावेनवुड’ में अमीर प्रॉपर्टी डेवलपर को पर्यावरण नष्ट करने वाला खलनायक बताया गया है। कैथरीन रनडेल की ‘द गुड थीव्स’ में एक बड़े उद्योगपति को धोखेबाज के रूप में दिखाया गया है। इसके उलट, 20वीं सदी के साहित्य में रईस पात्र हमेशा बुरे नहीं होते थे।

चार्ल्स डिकेंस के ‘ओलिवर ट्विस्ट’ के मिस्टर ब्राउनलो दयालु, उदार और अनाथ बच्चे की मदद करने वाले व्यक्ति थे। एनिड ब्लाइटन, आर्थर रैनसम और एलिजाबेथ गाउज की कथाओं में भी रईसों को नायक रूप में दिखाया गया। सवाल है कि क्या बाल कहानियां समाज की बदलती सोच दिखा रही हैं या फिर नया पूर्वाग्रह गढ़ रही हैं? कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की बाल शिक्षा विशेषज्ञ प्रो. मारिया निकोलाजेवा कहती हैं कि कहानियां बच्चों की नैतिक सोच को आकार देती हैं, इसलिए किसी एक वर्ग को लगातार नायक या खलनायक दिखाना उनकी सोच पर असर डाल सकता है। यूनेस्को और यूनिसेफ का कहना है कि बाल साहित्य में अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के पात्रों का संतुलन होना चाहिए। अगर किसी एक वर्ग को लगातार खलनायक दिखाया जाए, तो बच्चों में गलत धारणाएं बन सकती हैं।

आर्थिक असमानता का असर बाल कथाओं पर भी

बाल साहित्य विशेषज्ञ प्रो. मारिया निकोलाजेवा कहती हैं कि बाल कथाएं हमेशा अपने समय के सामाजिक मूल्यों का प्रतिबिंब रही हैं। आज आर्थिक असमानता, जलवायु संकट और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं, इसलिए इनका असर बाल कथाओं पर भी दिखाई दे रहा है। वहीं, बाल साहित्य विशेषज्ञ रोवेना पेन्सन कहती हैं, ‘हम अनजाने में बच्चों को यह सिखा रहे हैं कि पैसा कमाना या अमीर होना एक नैतिक बुराई है। इससे बच्चों के अवचेतन मन में सफलता और धन-समृद्धि को लेकर नफरत या हीन भावना पैदा हो सकती है

By Ashok Mishra

Ashok Mishra is the Editor-in-Chief of Chanakya News India, a Hindi digital news platform established in 2012. The organization focuses on delivering verified breaking news, live news coverage, crime, entertainment, business, technology, and regional updates across India. Address: FNG vihar 2 sector 121 Gautam budhnagar Uttar pradesh, India Email -mpcgchanakyanewsindia@gmail.com Phone– +91 9315744968

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