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*अमहट मंडी की समस्याओं का “अंबार”, व्यापारी नेताओं ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार – “जल्दी आंख खोलो”*

BySantosh Kumar Pandey

Jul 29, 2026

अमहट मंडी की बदहाली अब “नासूर” बन चुकी है। जाम, अतिक्रमण, पेयजल और सफाई जैसी समस्याओं से त्रस्त होकर भारतीय फल-सब्जी व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री _रवीन्द्र त्रिपाठी_ और मंडी अध्यक्ष _मोहम्मद शमीम_ के नेतृत्व में व्यापारी प्रतिनिधिमंडल ने आज _जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह_ से मुलाकात कर मंडी की “दुर्दशा” बताई।

व्यापारियों ने DM के सामने मंडी की 6 प्रमुख समस्याएं रखीं और कहा कि प्रशासन की कोशिशें “ऊंट के मुंह में जीरा” साबित हो रही हैं।

*व्यापारियों की 6 बड़ी मांगें:*

1. *जाम:* मंडी सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक लगती है। गेट नंबर 2 से 3 तक रोज “चींटी के रेंगने” जैसी हालत है। वाहनों के लिए “तिल धरने की जगह” नहीं।
2. *अतिक्रमण:* गेट के बाहर और परिसर में अवैध दुकानें-ठेले “सिर उठाकर” खड़े हैं। आवागमन पूरी तरह “बाधित”।
3. *पेयजल:* वाटर कूलर नंबर 3 और सरकारी नल “ठंडे बस्ते” में पड़े हैं। गर्मी में पीने के पानी को व्यापारी-किसान “दर-दर भटक” रहे हैं।
4. *सफाई:* कूड़े के ढेर और जाम नालियों के कारण हल्की बारिश में ही “जलभराव” हो जाता है। इससे फल-सब्जी खराब होकर व्यापारियों को “आर्थिक चपत” लग रही है।
5. *टेंडर नहीं:* पिछले 5 महीने से सफाई का टेंडर नहीं हुआ। गंदगी के कारण बीमारी फैलने का “खतरा मंडरा” रहा है।
6. *अन्य अव्यवस्था:* कैंटीन, शौचालय और सुरक्षा व्यवस्था “नाम के वास्ते” है।

मंडी अध्यक्ष शमीम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई रिटायर कर्मचारी और “अनाधिकृत” लोग मंडी सचिव का काम कर रहे हैं। कई संविदा कर्मी “भ्रष्टाचार के सरगना” बने हुए हैं। 15 साल से प्रमोशन के बाद भी कुछ अधिकारी “कुर्सी से चिपके” बैठे हैं और “पूर्वाग्रह से ग्रसित” होकर काम कर रहे हैं। इसकी जांच कर कार्रवाई की मांग की।

प्रदेश महामंत्री रवीन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि थोड़ी सी बारिश में ही मंडी “तालाब” बन जाती है। वर्षों से कैंटीन बंद पड़ी है, उसका टेंडर नहीं हुआ। उन्होंने DM से “स्वयं निरीक्षण” कर समस्याओं का “स्थाई निदान” कराने की अपील की।

*DM का आश्वासन*
जिलाधिकारी ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और जांच कराकर कार्रवाई व मंडी निरीक्षण का आश्वासन दिया।

इस मौके पर मोनू, नसीम, मेराज, मोहम्मद फुरकान, जगराम सोनकर सहित कई व्यापारी मौजूद रहे। अब देखना है कि प्रशासन कब “नींद से जागता” है या मंडी ऐसे ही “अंधेर नगरी चौपट राजा” बनी रहेगी।